
शिक्षा मंत्रालय ने “यूथ फेलोशिप ऑन लीडरशिप फॉर पीस एंड सस्टेनेबिलिटी” के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। यह एक अंतरराष्ट्रीय शिक्षण कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य युवाओं को शांति निर्माण, सतत विकास और नेतृत्व से जुड़े मुद्दों पर तैयार करना है।
इस फेलोशिप की घोषणा यूनेस्को महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन फॉर पीस एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट (MGIEP) की ओर से की गई है। कार्यक्रम का आयोजन दक्षिण कोरिया की क्यूंग ही यूनिवर्सिटी के ह्यूमनिटास कॉलेज में 25 जून से 4 जुलाई 2026 तक किया जाएगा। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, आवेदन करने की अंतिम तिथि 25 अप्रैल 2026 तय की गई है।
युवाओं में नेतृत्व और सामाजिक समझ विकसित करने पर फोकस
यह कार्यक्रम खास तौर पर उन भारतीय युवाओं के लिए तैयार किया गया है जो नेतृत्व, संवाद, सामाजिक बदलाव और सतत विकास जैसे विषयों में रुचि रखते हैं। फेलोशिप का उद्देश्य युवाओं को यह समझाना है कि शिक्षा, सहानुभूति और नागरिक भागीदारी के जरिए सामाजिक संघर्ष, विभाजन और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का समाधान कैसे खोजा जा सकता है।
यूनेस्को MGIEP के अनुसार, यह एक गहन और प्रैक्टिकल आधारित कार्यक्रम होगा, जिसमें एशिया-प्रशांत क्षेत्र के विभिन्न केस स्टडी शामिल किए जाएंगे। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को शांति और सतत विकास से जुड़े नेतृत्व मॉडल्स और व्यावहारिक तरीकों की जानकारी दी जाएगी, जिन्हें वे अपने समुदायों में लागू कर सकें।
बदलती शिक्षा व्यवस्था में बढ़ रही ऐसे कार्यक्रमों की अहमियत
विशेषज्ञों का मानना है कि आज नेतृत्व की चर्चा केवल अकादमिक प्रदर्शन या तकनीकी कौशल तक सीमित नहीं रह गई है। अब जलवायु कार्रवाई, जिम्मेदार नागरिकता, समावेशिता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व जैसे मुद्दे भी शिक्षा और युवा नीति का अहम हिस्सा बन रहे हैं।
ऐसे में यह फेलोशिप छात्रों और युवा प्रोफेशनल्स को वैश्विक मुद्दों को समझने और सामाजिक स्तर पर सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर प्रदान करेगी।
अंतरराष्ट्रीय अनुभव से मिलेगा नया दृष्टिकोण
दक्षिण कोरिया में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम प्रतिभागियों को अलग-अलग देशों और पृष्ठभूमि के छात्रों, शिक्षकों और विशेषज्ञों के साथ जुड़ने का मौका देगा। इससे युवा यह समझ पाएंगे कि स्थानीय समस्याएं किस तरह क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों से जुड़ी होती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम युवाओं को केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उन्हें सामाजिक समस्याओं के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करते हैं।
समुदाय स्तर पर काम करने की उम्मीद
फेलोशिप के लिए चुने गए प्रतिभागियों से उम्मीद की जाएगी कि वे कार्यक्रम से मिली सीख का उपयोग अपने समुदायों में शिक्षा, सामाजिक विकास और सतत विकास से जुड़े प्रोजेक्ट्स में करें। इस पहल का उद्देश्य युवाओं को केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि उन्हें बदलाव का सक्रिय भागीदार बनाना है।
आज के समय में जब दुनिया जलवायु संकट, सामाजिक तनाव और असमानता जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, ऐसे कार्यक्रम युवाओं को जिम्मेदार और संवेदनशील नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।




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