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भारतीय छात्रा ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी पर लगाया नस्ली प्रताड़ना का आरोप, शिकायतों पर कार्रवाई भी नहीं करने की कही बात

ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में नस्ली बर्ताव का शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। विश्वविद्यालय में नामांकित एक भारतीय छात्रा ने प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय पर नस्ली पूर्वाग्रह, उत्पीड़न और अन्याय का आरोप लगाया है। तमिलनाडु  के मदुरै की रहने वाली लक्ष्मी बालाकृष्णन का आरोप है कि विश्वविद्यालय में की गई अपीलों और शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। विश्वविद्यालय द्वारा स्थापित ‘अपील और शिकायत तंत्र’ से न्याय नहीं मिलने पर उन्होंने अब इसे लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू की है। लक्ष्मी ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की तरफ से पीएडी थीसिस रोकने पर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। 

लक्ष्मी ने बताया कि 2018 में उन्होंने आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में शेक्सपियर पर पीएचडी के लिए शोध कार्य शुरू किया। नवंबर 2021 में आंतरिक मूल्यांकन के दौरान मूल्यांकनकर्ताओं ने रिपोर्ट में यह तर्क देकर उन्हें फेल कर दिया कि शेक्सपियर में डॉक्टरेट स्तर के अध्ययन की गुंजाइश नहीं है। विश्वविद्यालय ने अनुबंध का उल्लंघन किया है। बकौल लक्ष्मी, विवि के आपत्तिजनक फैसले के खिलाफ अपीलों-शिकायतों की प्रक्रिया का पालन करने के बावजूद उन्हें निराशा ही हाथ लगी। बाध्य होकर उन्हें कानूनी कार्रवाई शुरू करनी पड़ी है।

भारतीय छात्रा बालाकृष्णन ने आरोप लगाया, ‘मैं मूल्यांकनकर्ताओं के फैसले को चुनौती नहीं दे रही, बल्कि नस्ली पूर्वाग्रह और प्रक्रियात्मक अनियमितता के आधार पर फैसले को चुनौती दे रही हूं।’ उन्होंने बताया, पीएचडी शोध पर करीब एक लाख पाउंड खर्च कर चुकी है। विश्वविद्यालय के फैसले से उन्हें न केवल आर्थिक क्षति हुई है, उनकी नौकरी की संभावनाएं भी धूमिल हो रही हैं।

खबरों के मुताबिक छात्रा ने नौकरी की उम्मीदें धूमिल होने का आरोप लगाते हुए कहा है कि दो श्वेत छात्रों को मंजूरी देने का फैसला नस्लीय पूर्वाग्रह से प्रेरित है। गौरतलब है कि लगभग एक साल पहले, सितंबर 2023 में भी तत्कालीन छात्र संघ अध्यक्ष रश्मि सामंत ने नस्ली बर्ताव के अनुभव साझा किए थे।

 

Asmita Sarkar

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