
कुछ दिनों पहले एक भारतीय इंफ्लुएंसर के साथ हुई घटना ने दक्षिण कोरिया के पास स्थित जेजू द्वीप को सुर्खियों में ला दिया। यात्रा के दौरान उन्हें लगभग 38 घंटे तक हिरासत में रखा गया और अपराधियों जैसा व्यवहार झेलना पड़ा। मामला वायरल होने के बाद Indian Embassy in Seoul को भारतीय पर्यटकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी करनी पड़ी। इसके बाद यह सवाल उठने लगा कि जेजू आखिर कैसा स्थान है, जहाँ भारतीय यात्रियों को बार-बार समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
जेजू एक प्राचीन ज्वालामुखीय द्वीप है, जिसका निर्माण लगभग दो मिलियन वर्ष पहले हुआ था। UNESCO ने इसे बायोस्फेयर रिज़र्व का दर्जा दिया है। कोरियाई प्रायद्वीप के दक्षिण में स्थित यह द्वीप अपनी प्राकृतिक संपदाओं, जैव विविधता और विरल प्रजातियों के कारण वैज्ञानिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। समुद्र तल से करीब 1,950 मीटर की ऊँचाई तक फैला लावा पठार, माउंट हाल्ला राष्ट्रीय उद्यान और कई छोटे-छोटे द्वीप इसके इकोसिस्टम का हिस्सा हैं।
जेजू का सबसे बड़ा आकर्षण इसकी अद्वितीय बायोडायवर्सिटी है। यहां चार प्रमुख इकोसिस्टम मिलते हैं—अल्पाइन शंकुधारी वन, शीतोष्ण चौड़ी पत्ती वाले जंगल, सदाबहार ल्यूसिडोफिल वन और विशाल घास के मैदान। इस द्वीप में कोरियाई मूल के 134 पौधों की प्रजातियां मिलती हैं, जिनमें से 90 जेजू की अपनी मानी जाती हैं। माउंट हलासान के आसपास कई ऐसी प्रजातियाँ पाई जाती हैं जो दुनिया में कहीं और नहीं मिलतीं।
यह द्वीप कई विलुप्तप्राय जीवों का भी घर है। तेंदुआ बिल्ली, डैम्सेलफिश, जेजू घोड़ा, हरा समुद्री कछुआ, काले चेहरे वाला स्पूनबिल और स्टेलर समुद्री शेर जैसी प्रजातियाँ यहाँ पाई जाती हैं। खास बात यह है कि जेजू दुनिया का एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जहाँ चार वैश्विक धरोहर एक ही स्थान पर मौजूद हैं—जेजू वोल्केनिक आईलैंड और लावा ट्यूब वर्ल्ड हैरिटेज साइट, बायोस्फेयर रिज़र्व, ग्लोबल जियोपार्क और दो रामसर वेटलैंड साइट।
जेजू द्वीप की संस्कृति भी उतनी ही अनोखी है। सदियों पुरानी “हेन्यो” परंपरा आज भी यहाँ जीवित है, जिसमें महिलाएँ बिना किसी आधुनिक उपकरण के समुद्र में गोता लगाकर भोजन एकत्र करती हैं। लेकिन नए उद्योगों के बढ़ते असर के कारण यह परंपरा तेजी से समाप्ति की ओर बढ़ रही है और इसका संरक्षण अब बड़ी चुनौती बन गया है।
हाल की घटना के बाद South Korea में भारतीय यात्रियों के लिए जारी एडवाइजरी काफी महत्वपूर्ण हो जाती है। जेजू में वीज़ा-फ्री एंट्री केवल अल्पकालिक पर्यटन के लिए है। प्रवेश का अंतिम निर्णय Seoul या जेजू के इमीग्रेशन अधिकारी ही लेते हैं। यह वीज़ा-फ्री प्लान किसी भी स्थिति में प्रवेश की गारंटी नहीं देता। सबसे अहम बात यह है कि जेजू से दक्षिण कोरिया की मुख्य भूमि में बिना वीज़ा जाना अवैध है। कई भारतीय पर्यटक इसी नियम को न समझ पाने के कारण परेशानी में फंस जाते हैं।
एडवाइजरी के मुताबिक, यदि किसी यात्री को एंट्री से इनकार किया जाता है, तो उसे अगली उपलब्ध फ्लाइट से वापस भेज दिया जाता है। भारतीय दूतावास ऐसे मामलों में केवल सहायता का अनुरोध कर सकता है, लेकिन दक्षिण कोरियाई इमीग्रेशन के निर्णय को बदल नहीं सकता।
जेजू अपनी प्राकृतिक सुंदरता, वैश्विक धरोहरों और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के लिए दुनिया भर के यात्रियों को आकर्षित करता है। लेकिन इसके साथ-साथ यह भी ज़रूरी है कि भारतीय पर्यटक यहां यात्रा करने से पहले स्थानीय नियमों और वीज़ा-फ्री नीतियों को अच्छी तरह समझ लें। थोड़ी सी जानकारी और सतर्कता यात्रियों को किसी भी अनावश्यक परेशानी से बचा सकती है।




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