
बिहार के गया जिले में स्थित मगध विश्वविद्यालय ने प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व के अध्ययन को नई दिशा देने के लिए 1960 में इतिहास विभाग से अलग एक नया विभाग स्थापित किया था। उस दौर में यह महसूस किया गया कि प्राचीन भारत के विस्तृत और विशिष्ट अध्ययन के लिए अलग कौशलों की आवश्यकता होती है। इन्हीं जरूरतों को समझते हुए विभाग की स्थापना की गई, जो आज भी इस क्षेत्र में अनुसंधान और शिक्षण का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है।
विभाग का मुख्य उद्देश्य भारत की प्राचीन विरासत के पुनर्निर्माण में सहायता करना है। इसके लिए यहां पुरातत्व, शिलालेख विज्ञान, पुरालेख विज्ञान, प्राचीन भाषाओं और मुद्राशास्त्र जैसे विषयों में विशेषज्ञता प्रदान की जाती है। समय के साथ यह विभाग न केवल भारतीय पुरातत्व और संस्कृति, बल्कि एशियाई सभ्यताओं के अध्ययन में भी अग्रणी बनकर उभरा है। वर्तमान में यहां प्रागैतिहासिक काल, प्रारंभिक ऐतिहासिक पुरातत्व, प्राचीन भारतीय संस्कृति और एशियाई अध्ययन से जुड़े अनुभवी विशेषज्ञ शिक्षण कार्य संभाल रहे हैं।
विभाग दो प्रमुख पाठ्यक्रम संचालित करता है—दो वर्षीय स्नातकोत्तर एमए (प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व) और चार वर्षीय बीए (प्राचीन भारतीय एवं एशियाई अध्ययन), जिसे सीबीसीएस पैटर्न के तहत तैयार किया गया है। इन पाठ्यक्रमों का मकसद छात्रों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देना नहीं, बल्कि व्यावहारिक अनुभव के माध्यम से उन्हें क्षेत्रीय अध्ययन में दक्ष बनाना है।
विभाग की अध्यक्ष डाॅ अलका मिश्रा के अनुसार इस विषय की बिहार में बड़ी उपयोगिता है, क्योंकि राज्य सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। वे बताती हैं कि विभाग छात्रों को कक्षा शिक्षण के साथ-साथ फील्ड वर्क और व्यावहारिक प्रशिक्षण भी देता है। विभाग के पास अपना संग्रहालय है, जहां विद्यार्थी पुरातात्विक सामग्री का अध्ययन करते हैं। इसके अलावा गुरुआ प्रखंड के दुब्बा गांव में विभाग को आधिकारिक उत्खनन लाइसेंस प्राप्त है, जिसके अंतर्गत छात्र प्रत्यक्ष पुरातात्विक कार्यों में भाग लेते हैं। इससे उन्हें शोध और फील्ड स्टडी की वास्तविक समझ मिलती है।
डाॅ मिश्रा कहती हैं कि कला एवं वास्तुकला, शिलालेख विज्ञान, संग्रहालय विज्ञान, विरासत प्रबंधन और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में करियर बनाने के इच्छुक छात्रों के लिए यह कोर्स विशेष रूप से लाभकारी है। बिहार की ऐतिहासिक संपन्नता को देखते हुए राज्य के युवाओं के लिए यह विषय न केवल ज्ञानवर्धक है, बल्कि अवसरों से भरा हुआ भी है।
मगध विश्वविद्यालय में जहां पीजी स्तर पर यह पाठ्यक्रम उपलब्ध है, वहीं कई संबद्ध कॉलेजों में स्नातक स्तर की पढ़ाई भी कराई जाती है। विभाग का उद्देश्य अगली पीढ़ी को भारत की प्राचीन धरोहर से जोड़ना और इसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने के लिए प्रशिक्षित करना है।




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