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पढ़ाई में AI से काम तेज, लेकिन गहरी समझ को लेकर चिंतित हैं 82% भारतीय छात्र

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पढ़ाई का तरीका तेजी से बदल रहा है। छात्र इसका इस्तेमाल जानकारी जुटाने, मुश्किल विषयों को समझने और असाइनमेंट पूरा करने में कर रहे हैं। लेकिन क्या AI की मदद से काम जल्दी पूरा करने का मतलब यह भी है कि छात्र विषय को अच्छी तरह सीख रहे हैं? भारतीय छात्रों के बीच हुए एक नए वैश्विक सर्वे में इसी सवाल को लेकर चिंता सामने आई है।

HP Futures 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वे में शामिल 82 प्रतिशत भारतीय छात्रों ने चिंता जताई कि AI की मदद से पढ़ाई का काम तेजी से पूरा तो हो जाता है, लेकिन इससे विषय को गहराई से समझने और लंबे समय तक याद रखने पर असर पड़ सकता है। इसके बावजूद छात्रों का AI के भविष्य को लेकर नजरिया सकारात्मक है। अधिकांश छात्रों को उम्मीद है कि AI रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा और वे अपने करियर में इसका जिम्मेदारी से इस्तेमाल कर सकेंगे।

रिपोर्ट बताती है कि छात्रों के लिए AI उपयोगी साधन जरूर बन रहा है, लेकिन वे पढ़ाई में अपनी समझ और याद रखने की क्षमता को लेकर पारंपरिक तरीकों की अहमियत भी महसूस करते हैं।

6,000 से अधिक छात्रों पर हुआ सर्वे

HP Futures 2026 की रिपोर्ट तैयार करने की पहल HP ने Global Learning Council और Education Leaders Forum के साथ मिलकर की। सर्वे में दुनिया के अलग-अलग देशों के 6,000 से अधिक छात्र शामिल हुए, जिनमें भारत के 758 छात्र थे। रिपोर्ट में शिक्षा, नीति निर्माण और भविष्य के रोजगार से जुड़े 58 विशेषज्ञों के विचार भी शामिल किए गए हैं। 

इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के बीच छात्रों को भविष्य की पढ़ाई और नौकरी के लिए किस तरह तैयार किया जा सकता है। इसके निष्कर्ष बताते हैं कि AI के इस्तेमाल की जानकारी के साथ-साथ विषयों की बुनियादी समझ, रचनात्मक सोच और समस्या सुलझाने की क्षमता पर ध्यान देना भी जरूरी है।

AI के साथ भी लिखे हुए नोट्स पर भरोसा

सर्वे में एक अहम बात सामने आई कि छात्र AI का इस्तेमाल पढ़ाई में तेजी लाने के लिए कर रहे हैं, लेकिन जानकारी को लंबे समय तक याद रखने के लिए लिखे हुए या प्रिंट किए गए नोट्स को भी महत्व देते हैं। रिपोर्ट में 82 प्रतिशत भारतीय छात्रों ने AI से तेजी से काम पूरा होने और विषय को गहराई से सीखने के बीच संभावित अंतर को लेकर चिंता जताई।

इसका अर्थ यह नहीं है कि AI से पढ़ाई करना नुकसानदेह है या हाथ से लिखे नोट्स हमेशा बेहतर होते हैं। सर्वे छात्रों की राय और उनकी चिंताओं को सामने रखता है; यह साबित नहीं करता कि AI का इस्तेमाल करने से हर छात्र की सीखने की क्षमता कम हो जाती है। हालांकि, इसके निष्कर्ष यह सवाल जरूर उठाते हैं कि अगर छात्र केवल AI से तैयार जवाब पढ़ें या असाइनमेंट पूरा करें, तो क्या उन्हें विषय की पूरी समझ मिल पाएगी?

छात्रों के लिए बेहतर तरीका यह हो सकता है कि वे AI का इस्तेमाल कठिन अवधारणाओं को समझने, उदाहरण जुटाने और अपनी गलतियां पहचानने के लिए करें। इसके बाद अपने शब्दों में नोट्स बनाना, बिना देखे जवाब लिखने का अभ्यास करना और पढ़े हुए विषय को दोहराना उनकी तैयारी को मजबूत कर सकता है।

78% छात्रों को उम्मीद, AI से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

AI के पढ़ाई पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर चिंता के बावजूद भारतीय छात्र भविष्य की नौकरियों को लेकर आशावादी हैं। सर्वे में करीब 78 प्रतिशत छात्रों का मानना है कि AI रोजगार के अवसर खत्म करने के बजाय नए अवसर पैदा करेगा। वहीं, 87 प्रतिशत छात्रों ने भरोसा जताया कि वे अपने भविष्य के करियर में AI टूल्स का प्रभावी और जिम्मेदारी से इस्तेमाल कर सकेंगे। 

हालांकि, छात्रों की यह उम्मीद इस बात की गारंटी नहीं है कि AI के कारण हर क्षेत्र में नौकरियां बढ़ेंगी। तकनीक के इस्तेमाल से कुछ कामों की प्रकृति बदल सकती है, कुछ भूमिकाओं की मांग घट सकती है और नए तरह के काम भी सामने आ सकते हैं। ऐसे में छात्रों के लिए केवल AI टूल चलाना सीखना ही काफी नहीं होगा। उन्हें अपने विषय की जानकारी, आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता और समस्याओं का समाधान निकालने की क्षमता भी विकसित करनी होगी।

92% भारतीय छात्रों को अपनी शिक्षा पर भरोसा

रिपोर्ट के अनुसार, सर्वे में शामिल 92 प्रतिशत भारतीय छात्रों का मानना है कि उनकी शिक्षा उन्हें नौकरी और कामकाजी जीवन के लिए तैयार कर रही है। यह आंकड़ा शिक्षा व्यवस्था के प्रति छात्रों के भरोसे को दिखाता है। लेकिन AI के तेजी से बदलते दौर में इस भरोसे को बनाए रखने के लिए पढ़ाई और कौशल विकास के तरीकों पर लगातार ध्यान देना होगा। 

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि पढ़ने-लिखने, गणित और बुनियादी शिक्षा को पढ़ाई का केंद्र बनाए रखा जाए। साथ ही, छात्रों को केवल जानकारी याद कराने के बजाय ऐसे व्यावहारिक और रचनात्मक तरीके अपनाए जाएं, जिनसे वे सीखी हुई बातों को समझ सकें और वास्तविक परिस्थितियों में उनका इस्तेमाल कर सकें।

AI के दौर में छात्रों को क्या सीखना चाहिए?

AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ शिक्षा संस्थानों के सामने चुनौती यह है कि छात्र तकनीक का लाभ उठाएं, लेकिन अपनी सोचने और सीखने की क्षमता पर निर्भर रहना भी जारी रखें। इसके लिए कक्षा में चर्चा, प्रोजेक्ट, प्रयोग, लेखन और समस्या-आधारित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सकता है।

छात्रों को AI से मिले जवाबों की जांच करना, भरोसेमंद स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करना और किसी विषय को अपने शब्दों में समझाना भी सीखना चाहिए। इससे वे केवल तैयार जवाबों पर निर्भर रहने के बजाय जानकारी का सही इस्तेमाल करना सीखेंगे।

HP Futures 2026 सर्वे का संदेश यही है कि भविष्य की शिक्षा में AI और पारंपरिक सीखने के तरीकों को एक-दूसरे का विकल्प मानने के बजाय सही संतुलन बनाना जरूरी है। AI छात्रों का काम आसान और तेज कर सकता है, लेकिन विषय की मजबूत समझ, स्वतंत्र सोच और लगातार सीखने की आदत विकसित करने की जिम्मेदारी अब भी छात्र, शिक्षक और शिक्षा संस्थानों की है।

Raish Ahmed

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