भारत के मार्केटिंग और विज्ञापन क्षेत्र में कंपनियां अब ऐसे नए ग्रेजुएट्स को प्राथमिकता दे रही हैं, जिन्हें डिजिटल कैंपेन चलाने, ऑनलाइन विज्ञापन प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने और आंकड़ों का विश्लेषण करने का व्यावहारिक अनुभव हो। TeamLease EdTech की नई रिपोर्ट के अनुसार, बड़े शहरों में डिजिटल मार्केटिंग और ऑनलाइन विज्ञापन से जुड़े शुरुआती स्तर के पद फ्रेशर्स के लिए नौकरी के प्रमुख अवसर बनकर उभरे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में प्रोग्रामैटिक एडवर्टाइजिंग एसोसिएट का पद फ्रेशर्स की भर्ती के लिहाज से सबसे आगे रहा। इस पद के लिए कंपनियों का भर्ती इरादा 50 प्रतिशत दर्ज किया गया। वहीं, मुंबई में डिजिटल मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव की भूमिका सबसे अधिक मांग में रही, जहां भर्ती का इरादा 48 प्रतिशत था। इससे पता चलता है कि कंपनियों को ऐसे उम्मीदवारों की जरूरत है, जो ऑनलाइन कैंपेन और डिजिटल मार्केटिंग से जुड़े काम संभाल सकें।
मार्केटिंग और विज्ञापन क्षेत्र में 59% कंपनियां करेंगी भर्ती
TeamLease EdTech की रिपोर्ट के अनुसार, मार्केटिंग और विज्ञापन क्षेत्र की 59 प्रतिशत कंपनियां 2026 की दूसरी छमाही में फ्रेशर्स की भर्ती करने की योजना बना रही हैं। वर्ष की पहली छमाही में यह आंकड़ा 62 प्रतिशत था। यानी भर्ती की योजना बनाने वाली कंपनियों का अनुपात थोड़ा घटा है, लेकिन डिजिटल विज्ञापन और मार्केटिंग से जुड़े विशेष कौशल वाले पदों की मांग बनी हुई है।
कंपनियां अब केवल डिग्री या किताबी जानकारी के आधार पर उम्मीदवार नहीं चुनना चाहतीं। वे ऐसे युवाओं को तलाश रही हैं, जो वास्तविक काम में अपने कौशल का इस्तेमाल कर सकें। इसमें विज्ञापन कैंपेन को बेहतर बनाना, सही दर्शकों तक विज्ञापन पहुंचाना, मीडिया प्लानिंग, सर्च मार्केटिंग और विज्ञापनों के प्रदर्शन का विश्लेषण करना शामिल है।
डिजिटल विज्ञापन से जुड़े पद फ्रेशर्स की प्रमुख नौकरियों में शामिल
रिपोर्ट के अनुसार, प्रोग्रामैटिक एडवर्टाइजिंग एसोसिएट और डिजिटल मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव के पद देशभर में फ्रेशर्स के लिए शीर्ष पांच भूमिकाओं में शामिल हैं।
प्रोग्रामैटिक एडवर्टाइजिंग में तकनीक और आंकड़ों की मदद से डिजिटल विज्ञापनों को सही दर्शकों तक पहुंचाने और उनके प्रदर्शन को बेहतर बनाने पर काम किया जाता है। वहीं, डिजिटल मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव सोशल मीडिया, सर्च इंजन और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मार्केटिंग गतिविधियों को संभाल सकता है। हालांकि, पद की जिम्मेदारियां कंपनी और नौकरी के प्रकार के अनुसार अलग हो सकती हैं।
रिपोर्ट के निष्कर्ष बताते हैं कि उच्च शिक्षा संस्थानों और कौशल विकास कार्यक्रमों को डिजिटल मार्केटिंग उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुरूप बनाने की आवश्यकता है। छात्रों के लिए केवल सैद्धांतिक जानकारी हासिल करना पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने और कैंपेन के नतीजों को समझने का अभ्यास भी करना होगा।
देशभर में फ्रेशर्स की भर्ती का इरादा बढ़ा
मार्केटिंग और विज्ञापन क्षेत्र से आगे बढ़कर देखें तो भारत में सभी क्षेत्रों को मिलाकर फ्रेशर्स की भर्ती का इरादा 2026 की दूसरी छमाही में 75 प्रतिशत दर्ज किया गया। पहली छमाही में यह आंकड़ा 73 प्रतिशत था।
रिपोर्ट में डिजिटल मार्केटिंग और एनालिटिक्स से जुड़े उन्नत प्रमाणपत्र पाठ्यक्रमों को युवाओं के कौशल बढ़ाने का एक विकल्प बताया गया है। ऐसे पाठ्यक्रम छात्रों को ऑनलाइन मार्केटिंग टूल्स, आंकड़ों के विश्लेषण और डिजिटल कैंपेन से जुड़े व्यावहारिक काम सीखने में मदद कर सकते हैं।
नए ग्रेजुएट्स के लिए इसका मतलब है कि डिग्री के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण और डिजिटल कौशल विकसित करना नौकरी की तैयारी को बेहतर बना सकता है। हालांकि, प्रमाणपत्र हासिल करने से नौकरी की गारंटी नहीं मिलती। चयन उम्मीदवार के कौशल, अनुभव, कंपनी की जरूरतों और भर्ती प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
1,097 कंपनियों के जवाब पर आधारित है रिपोर्ट
ये निष्कर्ष TeamLease EdTech की Career Outlook Report के 2026 की दूसरी छमाही वाले संस्करण का हिस्सा हैं। रिपोर्ट के लिए मई से जुलाई 2026 के बीच भारत के अलग-अलग उद्योगों और शहरों की 1,097 कंपनियों से प्रतिक्रियाएं जुटाई गईं।
रिपोर्ट में दर्ज भर्ती का इरादा कंपनियों की भर्ती योजनाओं को दर्शाता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि बताई गई सभी नौकरियां पहले से उपलब्ध हैं या सभी पदों पर भर्ती निश्चित रूप से होगी। फ्रेशर्स को आवेदन करने से पहले नौकरी की जिम्मेदारियों, जरूरी कौशल और पात्रता की जानकारी संबंधित कंपनी की आधिकारिक अधिसूचना में जांचनी चाहिए।




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