
NEET UG 2024: सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को नीट-यूजी परीक्षा से संबंधित 30 से अधिक याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इसमें पांच मई को हुई परीक्षा रद्द करने, एनटीए को दोबारा परीक्षा कराने का आदेश देने और अनियमितताओं के संबंध में कोर्ट की निगरानी में जांच किए जाने की मांग वाली याचिकाएं भी शामिल थीं और एनटीए को परीक्षा रद्द करने से रोकने की मांग वाली गुजरात के 50 से अधिक सफल परीक्षार्थियों की याचिका भी। इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा, “एक बात स्पष्ट है कि प्रश्नपत्र लीक हुआ है।” साथ कोर्ट ने कहा कि दोबारा परीक्षा का आदेश देने से पहले हमें लीक की सीमा के बारे में जानना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि परीक्षा को दोबारा से कराना सबसे आखिरी विकल्प होना चाहिए। लेकिन साथ ही कहा, “यदि मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी की पवित्रता “खो गई” है और यदि इसके प्रश्नपत्र के लीक होने की बात सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचारित की गई है, तो फिर से परीक्षा का आदेश देना होगा। यदि हम दोषियों की पहचान करने में असमर्थ हैं, तो फिर से परीक्षा का आदेश देना होगा। यदि प्रश्नपत्र लीक टेलीग्राम, व्हाट्सएप और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से हो रहा है, तो यह जंगल में आग की तरह फैल जाएगा।”
पीठ ने केंद्र और एनटीए से पूछा कि “इस गड़बड़ी से किन-किन छात्रों को फायदा पहुंचा? यह जानने के लिए क्या कार्रवाई की? कितने गलत काम करने वालों के परिणाम रोके गए? ये छात्र कहां हैं? भौगोलिक तौर पर ये छात्र कहां कहां हैं? क्या हम अभी भी गलत काम करने वालों का पता लगा रहे हैं और क्या हम लाभार्थियों की पहचान कर भी पाएं हैं?”
सुप्रीम कोर्ट ने साइबर फोरेंसिक यूनिट को शामिल करने, एआई का उपयोग करके गलत काम करने वालों की संख्या का पता लगाने और उनके लिए फिर से परीक्षा की संभावना तलाशने के बारे में पूछा। कोर्ट ने सीबीआई को जांच की स्थिति बताते हुए रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने एनटीए को निर्देश दिया कि वह बताए कि प्रश्नपत्र पहली बार कब लीक हुआ। वह प्रश्नपत्र लीक होने की घटना और 5 मई को परीक्षा आयोजित होने के बीच की समय अवधि के बारे में भी बताए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए 11 जुलाई की तारीख तय की।




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