
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने यूनिवर्सिटी ऑफ साउथहैंपटन को भारत में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध, ज्ञान आदान-प्रदान और उद्यमिता के लिए लाइसेंस दिया है। ये कैंपस स्थानीय विश्वविद्यालयों, उद्योगों और सरकार के साथ साझेदारी में शोध और ज्ञान आदान-प्रदान करेगा और इसके परिणामों का उपयोग सामाजिक और आर्थिक प्रभाव के लिए करेगा।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 2023 में भारत में विदेशी उच्च शिक्षण संस्थानों के कैंपस की स्थापना और संचालन के लिए नियम घोषित किए थे। इसके बाद, यूके की यूनिवर्सिटी ऑफ साउथेम्प्टन, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत भारत में अपना कैंपस स्थापित करने वाली पहली विदेशी यूनिवर्सिटी बनी।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधियों को आशय पत्र (एलओआई) सौंपा। अधिकारियों के अनुसार, साउथेम्प्टन यूनिवर्सिटी ने गुरुग्राम में एक शाखा कैंपस खोलने का प्रस्ताव पेश किया था, जिसे यूजीसी की स्थायी समिति ने नियमों के अनुसार एलओआई जारी करने के लिए मंजूरी दे दी है। यूजीसी की स्थायी समिति में भारत और विदेश के जाने-माने शिक्षाविद शामिल हैं।
केंद्रीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि ये हमारे शिक्षा मानकों को वैश्विक स्तर तक उठाने और भारत-यूके सहयोग के शिक्षा स्तंभ को साकार करने के दृष्टिकोण को दर्शाता है। वहीं, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि भारत एक ‘विश्व-बंधु’ के रूप में अपनी वैश्विक जिम्मेदारियों को पूरा करने और शिक्षा, नवाचार और प्रगति के लिए एक उज्जवल भविष्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
यूनिवर्सिटी ऑफ साउथहैंपटन के वाइस-चांसलर मार्क ई. स्मिथ ने कहा कि 21वीं सदी में कोई भी विश्वविद्यालय तब तक वैश्विक नहीं हो सकता जब तक वह भारत से नहीं जुड़ता। हमारी योजना भारत में एक ऐसा कैंपस स्थापित करने की है जो शिक्षा, शोध, और ज्ञान आदान-प्रदान में साउथहैंपटन की विश्व स्तरीय गतिविधियों को भारत की बढ़ती वैश्विक महाशक्ति के साथ जोड़कर सामाजिक और आर्थिक मूल्य प्रदान करेगा।
यूजीसी के चेयरमैन जगदीश कुमार ने कहा, “साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय के भारत परिसर द्वारा प्रदान की जाने वाली डिग्रियां मेजबान विश्वविद्यालय के समान ही होंगी। भारत में साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय के शाखा परिसर में पेश किए जाने वाले कार्यक्रमों में समान शैक्षणिक और गुणवत्ता मानक होंगे।”
जगदीश कुमार ने कहा, “साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय के भारतीय परिसर में जुलाई 2025 में अपने शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू होने की उम्मीद है। पेश किए जाने वाले पाठ्यक्रम व्यवसाय और प्रबंधन, कंप्यूटिंग, कानून, इंजीनियरिंग, कला और डिजाइन, जैव विज्ञान और जीवन विज्ञान पर केंद्रित विषयों में होंगे।”




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