
बालिकाओं को सशक्त और शिक्षित बनाने की मुहिम में जुटी केंद्र सरकार ने कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) को स्मार्ट स्कूल बनाने की दिशा में एक नई योजना तैयार की है। इस योजना के तहत इन विद्यालयों में पुस्तकालय, कंप्यूटर लैब और डिजिटल क्लासरूम जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने इस योजना के लिए प्रस्ताव और बजट तैयार कर लिया है जिसे जल्द ही सभी जिलों में लागू किया जाएगा। इस पर कुल 290 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह बजट पहले से जारी किए गए बजट से अलग होगा। इस पहल से इन स्कूलों में पढ़ने वाली सात लाख बालिकाओं को इसका लाभ मिलेगा।
गौरतलब है कि वर्तमान में देश के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 5116 केजीबीवी कार्यरत हैं। ये विद्यालय कक्षा छह से बारहवीं तक के आवासीय विद्यालय होते हैं जिसमें वंचित वर्ग यानी एससी, एसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यक और गरीबी रेखा के नीचे (बीपीएल) जीवनयापन करने वाली बालिकाओं को शिक्षा दी जाती है। सभी स्कूल पिछड़े क्षेत्रों में खोले गए हैं। शिक्षा मंत्रालय की ताज़ी पहल से बालिकाओं को डिजिटल रूप से दक्ष बनाया जाएगा और उनके ज्ञान एवं कौशल को बढ़ाया जाएगा। इससे डिजिटल ज्ञान में पुरुष और महिलाओं के बीच मौजूदा खाई को पाटना भी संभव हो जाएगा।
योजना का मुख्य उद्देश्य कस्तूरबा गांधी विद्यालयों को नवोदय विद्यालयों की तर्ज पर विकसित करना है, ताकि छात्राओं को एक बेहतर और उन्नत शिक्षण वातावरण प्रदान किया जा सके। इसमें आधारभूत संरचना को बेहतर करने के साथ-साथ शिक्षकों की कमी को भी दूर किया जाएगा। विद्यालयों में खेल मैदान, स्वच्छ पेयजल और डिजिटल क्लासरूम जैसी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। डिजिटल क्लासरूम के लिए 10 लाख रुपये तक खर्च किए जाएंगे और छात्राओं को ई-कंटेंट भी उपलब्ध कराया जाएगा।
आधारभूत संरचना को सुधारने के लिए कुछ स्थानों पर नए भवन का निर्माण किया जाएगा, जबकि कुछ विद्यालयों में रेनोवेशन किया जाएगा। कई विद्यालयों में छात्रावास की खराब स्थिति और सुविधाओं की कमी की शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिन्हें इस योजना के तहत दूर किया जाएगा।
इस योजना को लागू करने के पीछे मुख्य कारण कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों की वर्तमान स्थिति है। ये विद्यालय गरीब परिवार की बच्चियों को निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए स्थापित किए गए हैं, लेकिन कई स्कूलों में शिक्षिकाओं की अनुपस्थिति और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दे सामने आए हैं। इन समस्याओं को दूर कर विद्यालयों को व्यवस्थित और उन्नत बनाने के उद्देश्य से यह योजना तैयार की गई है।
इस पहल से कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों को एक नई दिशा मिलेगी और छात्राओं को एक सुरक्षित, सुसज्जित, और आधुनिक शिक्षा का वातावरण मिलेगा, जिससे उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सकेगा।




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