
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा है कि पुलिस अधिकारियों को पीड़ितों के साथ संवेदनशीलता और सहानुभूति के साथ काम करना चाहिए। उनसे न्याय सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी के प्रति अधिक प्रतिबद्धता की अपेक्षा की जाती है। यह बात राष्ट्रपति ने भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के प्रशिक्षुओं के एक समूह को संबोधित करते हुए कही।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि कानून और व्यवस्था केवल शासन की नींव नहीं बल्कि, आधुनिक राज्य की आधारशिला भी है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से कहा कि वे कुशल, संवेदनशील और निर्भीक हों। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने, न्याय सुनिश्चित करने और नागरिक अधिकारों की रक्षा किए बिना प्रगति एक अर्थहीन शब्द बन जाता है। आर्थिक व सामाजिक विकास केवल तभी संभव है, जब कानून का शासन स्थापित हो।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि भारत के भविष्य के लिए पुलिस की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि कानून का राज स्थापित करना जरूरी है। मुर्मू ने पुलिस अधिकारियों को तकनीकी ज्ञान रखने और अपराधियों से एक कदम आगे रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि तकनीक में प्रगति से कानून और व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिली है। लेकिन अपराधी भी तकनीक का उपयोग कर रहे हैं।
मुर्मू ने भारतीय पुलिस सेवा में महिला अधिकारियों की संख्या में इजाफा होने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि इस बैच में 188 प्रशिक्षुओं में 54 महिला अधिकारी हैं, जो पिछले साल के मुकाबले एक महत्वपूर्ण वृद्धि है। राष्ट्रपति ने कहा कि महिला अधिकारियों की बढ़ती संख्या पुलिस के चरित्र को बेहतर बना सकती है।
महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर राष्ट्रपति ने कहा कि यह एक गंभीर समस्या है, जिसकी एक बीमार मानसिकता के साथ-साथ घृणित सामाजिक पूर्वाग्रहों में गहरी जड़ें हैं। यह सबसे पहले एक अपराध है। इसलिए, इससे लड़ने के लिए कई स्तरों पर कार्रवाई की आवश्यकता होती है। लेकिन पहली प्रतिक्रिया पुलिस बल की ओर से आती है।
उन्होंने आईपीएस अधिकारियों को सलाह दी कि वे अपने मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें और योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। राष्ट्रपति ने कहा, आपके कंधों पर बड़ी जिम्मेदारियां हैं। मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी न करें। योग और ध्यान को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। उन्होंने कहा, आईपीएस का ‘एस’ सेवा के लिए है। हमारी प्राथमिकता देश और इसके नागरिकों की सेवा करना है।




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