Edinbox Hindi

केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती को लेकर छिड़ी बहस, कांग्रेस के आरोप पर शिक्षा मंत्री का पलटवार

केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के उन दावों पर भाजपा ने पलटवार किया है जिसमें उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार पर आरक्षित श्रेणी के अध्यापकों के अधिकार छीनने का आरोप लगाया था। खड़गे के आरोपों पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस पर ही झूठे दावे फैलाने का आरोप लगाया है। 

धमेंद्र प्रधान ने खड़गे के पोस्ट को री-ट्वीट करते हुए लिखा, ‘कांग्रेस पार्टी की आदत सिर्फ झूठ बोलने की है। एक झूठ जब इनका टिकता नहीं है, तो दूसरा झूठ लेकर निकल पड़ते हैं जबकि सच शीशे की तरह बिल्कुल साफ है। 2014 में कांग्रेस की यूपीए सरकार के समय केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 16,217 स्वीकृत पद थे जिसमें 6042 पद, कुल 37% पद रिक्त थे। SC, ST व OBC के 57%, 63% और 60% पद खाली थे।’ 

उन्होंने आगे लिखा, ‘हर वर्ग को साथ लेकर इन सभी रिक्त पदों को भरने का काम मोदी सरकार तेजी से कर रही है। यही वजह है कि 2014 की तुलना में 2024 में स्वीकृत पदों की संख्या (18,940) में वृद्धि होने के बाद भी कुल रिक्त पदों की संख्या 37% से घटकर आज 26.8% हो गयी है। पिछले दो वर्षों के दौरान मिशन मोड पर 6890 से अधिक शैक्षणिक पदों पर भर्ती की गयी है, जिसमें 939 (13.6%) SC, 464 (6.7%) ST, 1535 (22.27%) OBC और 348 (5.05%) EWS से हैं। केंद्रीय विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों पर भर्ती एक चलने वाली प्रक्रिया है जो अभूतपूर्व गति से लगातार जारी है।”

धमेंद्र प्रधान ने उलटे कांग्रेस से ही सवाल किया कि कांग्रेस पार्टी को बताना चाहिए कि 60 साल तक देश में शासन करने के बावजूद उसने दलित, शोषित और पिछड़ों को उनके अधिकारों से क्यों वंचित रखा? आखिर क्या कारण था कि देश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में उन्हें प्रतिनिधित्व नहीं मिला?  

गौरतलब है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने हाल ही में केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला था।  खड़गे ने अपने ट्विटर हैंडल से एक पोस्ट में आरोप लगाया था कि मोदी सरकार केंद्रीय विश्विद्यालय में आरक्षित श्रेणी के अध्यापकों के अधिकार छीन रही है और फिर भी जनकल्याण की बातें कर रही है। उन्होंने एक आरटीआई रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा था कि 46 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 18,940 स्वीकृत पदों में से 27% शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं, जिनमें से 38% से अधिक पद एससी, एसटी और ओबीसी आरक्षण के अंतर्गत आते हैं। 

मल्लिकार्जुन खड़गे का कहना था कि केंद्रीय विद्यालयों में प्रोफ़ेसर श्रेणी के 55% पद ख़ाली पड़े हैं। EWS के 71% शिक्षण पद ख़ाली हैं। गैर-शिक्षकों के 35,640 पदों में भी 47% से अधिक पद रिक्त हैं। उन्होंने कहा था कि मोदी सरकार का “सबका साथ, सबका विकास” नारा सामाजिक न्याय की लड़ाई को ठेंगा दिखाकर मख़ौल उड़ाता है।  

Asmita Sarkar

Add comment

Recent posts

Most popular

Most discussed