
राजधानी दिल्ली के डॉ. भीम राव अंबेडकर विश्वविद्यालय ने गैर-शिक्षण कर्मचारियों यानी नॉन-टीचिंग कर्मचारियों की अवैध नियुक्ति के आरोप में अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए दो प्रोफेसरों को नौकरी से निकाल दिया है। यूनिवर्सिटी ने यह कार्रवाई उच्च शिक्षा निदेशालय, एनसीटी दिल्ली सरकार की गहन जांच के बाद की है। जांच में पाया गया कि दोनों प्रोफेसर्स, प्रो. सलिल मिश्रा और प्रो. अस्मिता काबरा ने साल 2019 में प्रशासनिक पदों पर रहते हुए नॉन-टीचिंग कर्मचारियों की नियुक्ति में नियमों का पालन नहीं किया था।
दरअसल, यह मामला कथित तौर पर प्रोफेसरों द्वारा अपने पद के दुरुपयोग से जुड़ा है, जिन्होंने 2019 में प्रशासनिक पदों पर रहते हुए 39 नॉन-टीचिंग कर्मचारियों की अवैध नियुक्ति की थी। इसमें नियमों का उल्लंघन हुआ था और कोई विज्ञापन नहीं निकाला गया था और मनमाने तरीके से भर्तियां की गईं थीं। मामला सामने आने पर जांच की गई और नियुक्तियां सही नहीं पाईं गईं। इसके बाद 2020 में सभी कर्मचारियों को सेवा से हटा दिया गया। नियुक्तियां करने वाले सक्षम अधिकारियों के खिलाफ जांच बैठाई गई थी, जिसमें अब फैसला आया है। नॉन-टीचिंग स्टाफ की भर्ती में गड़बड़ी को लेकर यूनिवर्सिटी ने दो प्रोफेसरों को निकालने का फैसला लिया है। विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने कहा कि यह फैसला एक जांच के आधार पर लिया गया है, जिसमें 2019 में नॉन-टीचिंग पदों को रेगुलर करने के लिए तय नीति को अनदेखा करके नियुक्तियां की गई थीं। जांच के बाद नॉन-टीचिंग स्टाफ पदों पर कथित गलत तरीके से हुई नियुक्तियों में दोनों प्रोफेसरों की भूमिका सामने आई है।
डॉ. बी. आर. अंबेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, “उच्च शिक्षा निदेशालय द्वारा शुरू की गई जांच में कई गड़बड़ियां सामने आई हैं, जिसके बाद विश्वविद्यालय के मैनेजमेंट बोर्ड (बीओएम) ने एक जांच समिति गठित की थी। जांच रिपोर्ट, लिखित रिपोर्ट और विजिलेंस डिविजन से मिले इनपुट पर विचार करने के बाद, बीओएम ने दोनों प्रोफेसरों को तत्काल प्रभाव से सेवा से हटाने का फैसला लिया।” बयान में आगे कहा गया कि अनुशासनात्मक कार्रवाई केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम 1965 के तहत की गई थी, जो विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के आचरण को नियंत्रित करता है।
इस बीच, डॉ. भीम राव अंबेडकर यूनिवर्सिटी दिल्ली (AUD) में दो प्रोफेसरों को हटाने के फैसले के बाद छात्र संगठन इसके विरोध में उतर आए हैं। छात्रों ने फैसले के बाद यूनिवर्सिटी कैंपस में प्रदर्शन किया। छात्रों का दावा है कि दोनों प्रोफेसरों को गलत तरीके से निकाला जा रहा है। विश्वविद्यालय के फैसले की आलोचना करते हुए प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रोफेसरों को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि उन्होंने जांच प्रक्रिया की पारदर्शी समीक्षा की मांग की थी। कई छात्र संगठनों ने दोनों प्रोफेसरों की बहाली की मांग को लेकर एयूडी परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। इस निर्णय के विरोध में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने 11 नवंबर को विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन की घोषणा की है।




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