
ब्रिटेन की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल बेंगलुरु में अपना अंतरराष्ट्रीय कैंपस खोलने जा रही है। शैक्षणिक सत्र 2026 से इस कैंपस में डिग्री कार्यक्रमों की पढ़ाई शुरू होगी। यह भारत में ब्रिटेन का दूसरा और किसी विदेशी विश्वविद्यालय का चौथा कैंपस होगा। इससे पहले यूनिवर्सिटी ऑफ साउथैम्पटन भी भारत में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी है।
इसकी औपचारिक घोषणा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की उपस्थिति में सोमवार को दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की गई। इस मौके पर मंत्री ने यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल को ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ (आशय पत्र) भी सौंपा।
धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि 1881 में स्थापित लिवरपूल यूनिवर्सिटी के इस नए कैंपस में अगले वर्ष से दाखिले शुरू होंगे, जहां छात्रों को कानून, बिजनेस और हेल्थ साइंसेज जैसे प्रमुख कोर्स पढ़ाए जाएंगे। साथ ही उन्होंने यह भी जानकारी दी कि यूनिवर्सिटी ऑफ साउथैम्पटन में भी शैक्षणिक सत्र 2025-26 से नामांकन शुरू हो जाएगा।
शिक्षा मंत्री ने इसे भारत में शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस साल 15 विदेशी विश्वविद्यालय भारत में अपने कैंपस शुरू करने की योजना बना रहे हैं, जिससे न केवल छात्रों को वैश्विक स्तर की शिक्षा मिलेगी, बल्कि भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली भी और मजबूत होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय कैंपस भारत में अनुसंधान और नवाचार के नए द्वार खोलेंगे। वर्तमान में देश में 30 करोड़ छात्र हैं, जिनमें से चार करोड़ से अधिक उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। भारत में 1,200 से अधिक विश्वविद्यालय और 50,000 से अधिक कॉलेज व संस्थान हैं। अभी देश का ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) लगभग 26-27% है, जिसे अगले पांच वर्षों में 50% तक ले जाने का लक्ष्य है।
गौरतलब है कि अब तक यूजीसी ने अमेरिका की इलिनॉय इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, ऑस्ट्रेलिया की विक्टोरिया यूनिवर्सिटी और वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी, तथा इटली की डिजाइन यूनिवर्सिटी को भारत में कैंपस खोलने की अनुमति दी है।




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