
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने आठवीं कक्षा के लिए सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक “एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियोंड” तैयार की है। यह पुस्तक इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र और अर्थव्यवस्था को एक समग्र रूप में प्रस्तुत करती है, जिसमें मुगल काल, मराठा साम्राज्य, विजयनगर जैसे ऐतिहासिक संदर्भों से लेकर भारत की संसदीय प्रणाली और लोकतांत्रिक प्रक्रिया तक की जानकारी दी गई है।
चार थीम, सात अध्याय: ज्ञान का समृद्ध विन्यास
इस पुस्तक को चार मुख्य थीम और सात अध्यायों में विभाजित किया गया है:
1. भूगोल और संसाधन – भारत और विश्व की भौगोलिक स्थिति, प्राकृतिक संसाधनों और उनके उपयोग पर केंद्रित है।
2. इतिहास और विरासत – इसमें मराठा शक्ति का उदय, भारत का उपनिवेशीकरण, और स्वतंत्रता से पहले व बाद की राजनीतिक घटनाएं शामिल हैं।
3. शासन और लोकतंत्र – इस खंड में भारत की चुनावी प्रणाली, संसद की कार्यप्रणाली, विधायिका और कार्यपालिका की भूमिका को विस्तार से समझाया गया है।
4. आर्थिक जीवन – इसमें छात्रों को विभिन्न उत्पादों के निर्माण और आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा गया है।
इतिहास की संवेदनशील घटनाओं का समावेश
पुस्तक में राजपूत महिलाओं द्वारा किए गए जौहर, रानी लक्ष्मीबाई और बेगम हजरत महल की वीरता तथा आत्मसम्मान की गाथाएं प्रमुखता से शामिल हैं। मुगल शासनकाल में गैर-मुस्लिमों से वसूले जाने वाले जजिया कर की जानकारी भी दी गई है — जिसे धार्मिक संरक्षण के बदले लिया जाता था।
इतिहास को समकालीन घटनाओं से जोड़ते हुए शिवाजी द्वारा शाइस्ता खान पर किए गए साहसी हमले की तुलना भारत की हाल की सर्जिकल स्ट्राइक से की गई है। विशेष रूप से 5 अप्रैल 1663 की रात को लाल महल, पुणे में हुआ यह हमला, शिवाजी की रणनीतिक सूझबूझ को दर्शाता है।
लोकतंत्र की कार्यप्रणाली और संसद का विस्तृत अध्ययन
पुस्तक में भारत की चुनाव प्रणाली पर विशेष अध्याय है, जिसमें लोकसभा, राज्यसभा, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रियाएं स्पष्ट की गई हैं। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री द्वारा 1956 में एक रेल दुर्घटना के बाद दिया गया इस्तीफा भी लोकतांत्रिक नैतिकता का उदाहरण स्वरूप शामिल है।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रसिद्ध कविता “सरकारें आएंगी-जाएंगी, पार्टियां बनेंगी-बिगड़ेंगी, लेकिन यह देश रहना चाहिए…” को भी पुस्तक का हिस्सा बनाया गया है, जो छात्रों को लोकतंत्र और राष्ट्र की स्थिरता के महत्व से परिचित कराती है।
धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं की झलक
पुस्तक में भगवद गीता में श्रीकृष्ण और अर्जुन के संवाद का उल्लेख भी है, जिससे छात्रों को भारतीय धार्मिक ग्रंथों की नैतिक शिक्षाओं से परिचित कराया गया है।
निष्कर्षतः, यह नई पाठ्यपुस्तक केवल ऐतिहासिक तथ्यों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह छात्रों में सांस्कृतिक समझ, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक विविधता को भी विकसित करने का प्रयास है। यह शिक्षण सामग्री न केवल ज्ञानवर्धक है, बल्कि छात्रों को एक जागरूक और जिम्मेदार नागरिक के रूप में तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।




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