Edinbox Hindi

देशभर में कुल 31.56 करोड़ छात्रों को मिली यूनिक डिजिटल पहचान; उत्तर प्रदेश अव्वल, बंगाल सबसे पीछे

देशभर में छात्रों को शिक्षा से जुड़े दस्तावेज और सुविधाएं एकीकृत करने की दिशा में बड़ी पहल करते हुए अब तक कुल 31.56 करोड़ छात्रों को ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री (अपार-ID) के तहत 12 अंकों की विशिष्ट डिजिटल पहचान प्रदान की जा चुकी है। इनमें से 13.89 करोड़ छात्र स्कूलों के हैं। यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत उठाया गया है, जिसमें छात्रों के शैक्षणिक रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण की सिफारिश की गई थी।

सबसे आगे उत्तर प्रदेश है, जहां 2.46 करोड़ स्कूली छात्र पहले ही अपार-आईडी से जुड़ चुके हैं। राज्य के कुल 2.54 लाख स्कूलों में से 94% स्कूलों के छात्र इसमें शामिल हो चुके हैं। हालांकि, अब भी 1.68 करोड़ छात्रों की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया बाकी है।

अन्य राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र में 1.83 करोड़, बिहार में 1.21 करोड़, राजस्थान में 1.03 करोड़, हरियाणा में 48.54 लाख, पंजाब में 35.94 लाख, दिल्ली में 34.77 लाख, उत्तराखंड में 16.33 लाख, जम्मू-कश्मीर में 13.78 लाख, हिमाचल प्रदेश में 9.06 लाख, चंडीगढ़ में 2.19 लाख, लद्दाख में 45 हजार, और मध्य प्रदेश में 99 हजार छात्रों को अब तक अपार-ID जारी की जा चुकी है।

इसके अलावा, नवोदय विद्यालयों के 2.69 लाख और केंद्रीय विद्यालयों के 10.70 लाख छात्र भी इस प्रणाली से जुड़ चुके हैं। गौर करने वाली बात यह है कि 17 अप्रैल को एक दिन में एक लाख से अधिक अपार-ID जारी करने का रिकॉर्ड भी बनाया गया है।

पश्चिम बंगाल की स्थिति
इन उपलब्धियों के बीच पश्चिम बंगाल देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जहां अब तक एक भी छात्र अपार-ID से नहीं जुड़ा है। राज्य में 1.76 करोड़ छात्र पंजीकृत हैं, लेकिन एक भी अपार-ID नहीं बनी है। सूत्रों के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकार (मुख्यमंत्री ममता बनर्जी) के बीच जारी मतभेदों का असर स्कूली शिक्षा की योजनाओं पर पड़ा है, जिसके कारण यह डिजिटल पहल अभी तक राज्य में लागू नहीं हो पाई है।

अपार-ID क्या है?
अपार-ID (Automated Permanent Academic Account Registry) छात्रों को दी जाने वाली 12 अंकों की यूनिक डिजिटल पहचान है। इसका उद्देश्य छात्रों के शैक्षणिक रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण करना है, जिसमें परीक्षा परिणाम, प्रमाण पत्र, कोर्स विवरण, छात्रवृत्तियां, व अन्य शैक्षणिक गतिविधियां शामिल हैं। इससे छात्रों को स्कूल या कॉलेज बदलने, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, या विदेशों में पढ़ाई के लिए आवेदन करते समय दस्तावेज़ों की प्रमाणिकता और पहुंच में आसानी होती है।

एनईपी 2020 की पांचवीं वर्षगांठ पर खास रिकॉर्ड
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की पांचवीं वर्षगांठ 29 जुलाई 2025 को मनाई गई। इस नीति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 जुलाई 2020 को देश को समर्पित किया था। NEP 2020 की प्रमुख सिफारिशों में अपार-ID जैसी डिजिटल पहलों को शामिल किया गया था, जिसका लक्ष्य छात्रों के बीच शिक्षा की गुणवत्ता, पारदर्शिता और पहुंच को बेहतर बनाना है।

भारत में शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे डिजिटल परिवर्तन के तहत अपार-ID जैसी पहल छात्रों के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर रही है। यह न केवल छात्रों की शैक्षणिक जानकारी को संरक्षित करती है, बल्कि उन्हें कई सरकारी व निजी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में भी सक्षम बनाती है। हालांकि कुछ राज्यों में इस योजना के कार्यान्वयन को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं, फिर भी यह पहल देशभर में शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सक्षम बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।

Asmita Sarkar

Add comment

Recent posts

Most popular

Most discussed