
दिल्ली सरकार के एक फैसले से 15 हज़ार अतिथि शिक्षकों (Guest Teachers) का भविष्य अधर में लटक गया है। उनके सामने रोजी रोटी का संकट आ खड़ा हुआ है। दरअसल, दिल्ली सरकार ने सरकारी स्कूलों में शिक्षण कार्य कर रहे लगभग 15 हजार गेस्ट शिक्षकों की सेवाएं समाप्त करने का फरमान सुना दिया है। शिक्षा निदेशालय ने बाकायदा इस सम्बन्ध में आदेश जारी कर स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश की घोषणा के साथ ही इन अतिथि शिक्षकों की सेवाओं को समाप्त कर दिया है।
शिक्षा निदेशालय की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि अतिथि शिक्षकों की सेवाएं 11 मई से 30 जून तक समाप्त की जाती हैं। हालांकि निदेशालय की ओर से सेवा समाप्त करने के आदेश में स्कूल प्रमुखों को अधिकृत किया गया है कि वे ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान जरूरत पड़ने पर अतिथि शिक्षकों को बुला सकते हैं। स्कूल बुलाने पर उन्हें भुगतान किया जाएगा। स्कूल अतिथि शिक्षकों को शैक्षणिक, दाखिले व परीक्षा से संबंधित कार्यों के लिए बुला सकते हैं।
सरकार के इस आदेश पर शिक्षकों ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि जब बीते साल निदेशालय ने अतिथि शिक्षकों के अनुबंध को एक जुलाई 2023 से 30 जून तक बढ़ाया था, तो समय से पहले अनुबंध को ख़त्म करना अनुचित है। शिक्षकों ने सेवा समाप्त करने के आदेश को अन्यायपूर्ण बताते हुए सरकार से इस आदेश को वापस लेने की मांग की है। आल इंडिया गेस्ट टीचर एसोसिएशन ने इस सम्बन्ध में शिक्षा निदेशालय को पत्र भी लिखा है।
गेस्ट टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण डेढ़ा और महासचिव शोएब राणा ने कहा है कि निदेशालय ने एक आदेश जारी कर सरकारी स्कूलों के हज़ारों अतिथि शिक्षकों का समय से पहले अनुबंध ख़त्म कर उन्हें बेरोज़गार कर दिया, जो कि निहायत ही अनुचित है। जब शिक्षा विभाग ने अपने पहले आदेश में अनुबंध को 30 जून 2024 तक बढ़ाया था तो इस समय गेस्ट टीचर्स को बेरोजगार करने का आदेश बेतुका और अन्यायपूर्ण है। सेवा समाप्त होने से अतिथि शिक्षकों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।




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