
कोवाक्सिन (Covaxin) पर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय यानी बीएचयू (BHU) द्वारा हाल ही में किए गए एक अध्ययन को लेकर अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी आईसीएमआर (ICMR) ने इस अध्ययन से किनारा कर लिया है। उसने बीएचयू के अध्ययन पर एतराज जताते हुए कहा है कि हमें इस खराब डिजाइन वाले अध्ययन से न जोड़ा जाए।
गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में, बीएचयू के शोधकर्ताओं की एक टीम ने भारत बायोटेक द्वारा निर्मित कोवाक्सिन पर एक साल के अध्ययन की रिपोर्ट पेश की थी। इसमें कोवाक्सिन के कारण होने वाले साइड-इफेक्ट्स को लेकर भी लोगों को सावधान किया गया है। अध्ययन के अनुसार, कोवाक्सिन टीका प्राप्त करने वाले लगभग एक-तिहाई लोगों ने एडवर्स इवेंट ऑफ सोशल इवेंट (एईएसआई) की शिकायत की थी। लेकिन अब इस अध्ययन पर भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी आईसीएमआर ने सवाल खड़े कर दिए हैं।
आईसीएमआर के महानिदेशक ने कहा है कि आईसीएमआर को इस खराब डिजाइन वाले अध्ययन से नहीं जोड़ा जा सकता है, जिसका उद्देश्य कोवाक्सीन का ‘सुरक्षा विश्लेषण’ प्रस्तुत करना है। इतना ही नहीं, उन्होंने पेपर के लेखकों और पत्रिका के संपादक को एक पत्र लिखकर कहा है कि इससे आईसीएमआर का नाम हटा दिया जाए और इस संबंध में शुद्धि-पत्र भी प्रकाशित किया जाए। आईसीएमआर ने बीएचयू के इस अध्ययन की खराब कार्यप्रणाली और डिजाइन पर भी सवाल उठाए हैं।
बता दें कि बीएचयू के इस अध्ययन के अनुसार, भारत बायोटेक की वैक्सीन कोवाक्सिन प्राप्त करने वाले लगभग एक-तिहाई लोगों ने एक साल बाद तक कई दुष्प्रभावों की शिकायत की है। 926 प्रतिभागियों पर किए गए अध्ययन में लगभग 50 प्रतिशत ने शोध की अवधि के दौरान भी संक्रमण की शिकायत की। 10.5 प्रतिशत लोगों में त्वचा से संबंधित समस्या, 10.2 प्रतिशत में सामान्य विकार और 4.7 प्रतिशत में तंत्रिका से संबंधित समस्याएं देखी गईं।




Add comment