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बॉस से बात करते समय आंखों में आंखें डालकर देखना क्या बताता है? नए शोध में सामने आया दिलचस्प कनेक्शन

ऑफिस में बॉस या सीनियर से बात करते समय आपकी नजरें कहां रहती हैं, क्या यह भी आपकी प्रोफेशनल छवि को प्रभावित कर सकता है? एक नए मनोवैज्ञानिक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया है कि किसी कर्मचारी का अपने लीडर की आंखों की ओर कितनी बार देखना उसके जिम्मेदार और कर्तव्यनिष्ठ व्यक्तित्व (Conscientiousness) के बारे में दूसरों की धारणा को प्रभावित कर सकता है।

Journal of Applied Social Psychology में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने यह समझने की कोशिश की कि कर्मचारी बातचीत के दौरान अपनी नजरों का इस्तेमाल किस तरह अपनी छवि बनाने के लिए करते हैं। अध्ययन का नेतृत्व Simon Liegl ने किया। उनके साथ Thomas Maran, Marco Furtner और Pierre Sachse इस शोध में शामिल थे। अध्ययन 2026 में जर्नल के वॉल्यूम 56 में प्रकाशित हुआ है।

बॉस की आंखों में देखने से क्या संकेत मिलता है?

शोध का मुख्य फोकस यह पता लगाना था कि क्या कर्मचारी की नजरों का व्यवहार उसके व्यक्तित्व के बारे में कोई संकेत देता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन प्रतिभागियों ने खुद को अधिक कर्तव्यनिष्ठ बताया, वे बातचीत के दौरान अपने लीडर की आंखों की ओर अधिक बार देखते थे। खास तौर पर जब वे खुद बोल रहे थे, तब भी उनकी नजरें लीडर की ओर अधिक रहती थीं।

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह व्यवहार दूसरों की नजर में व्यक्ति को अधिक कर्तव्यनिष्ठ समझे जाने से भी जुड़ा था। यानी आंखों का संपर्क केवल बातचीत का हिस्सा नहीं रहा, बल्कि सामने वाला व्यक्ति इससे वक्ता के बारे में एक धारणा भी बना सकता है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि जो कर्मचारी आंखों में देखकर बात नहीं करता, वह गैर-जिम्मेदार या बेईमान है। शोध खुद बताता है कि नजरों के व्यवहार को किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व का अकेला और पक्का पैमाना नहीं माना जा सकता। आंखों से जुड़ी धारणाएं परिस्थिति और व्यक्ति के व्यवहार के आधार पर बदल सकती हैं।

रचनात्मक सोच वाले लोगों का नजरिया थोड़ा अलग मिला

अध्ययन में केवल कर्तव्यनिष्ठा ही नहीं, बल्कि व्यक्तित्व के दूसरे पहलुओं को भी देखा गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि Openness, यानी नए विचारों और अनुभवों के प्रति खुलापन, बोलते समय कम आंखों के संपर्क से जुड़ा था।

इसका अर्थ यह नहीं है कि रचनात्मक या खुले विचारों वाले लोग आंखों में देखकर बात नहीं कर सकते। अध्ययन में सिर्फ इतना संबंध पाया गया कि अधिक openness वाले प्रतिभागियों ने बातचीत के दौरान लीडर की आंखों की ओर अपेक्षाकृत कम नजरें डालीं।

यही वजह है कि शोध को इस रूप में समझना जरूरी है कि अलग-अलग व्यक्तित्व वाले लोग बातचीत के दौरान नजरों का इस्तेमाल अलग तरीके से कर सकते हैं।

स्मार्ट चश्मे से रिकॉर्ड की गई आंखों की हर गतिविधि

इस अध्ययन की खास बात इसकी शोध पद्धति थी। प्रतिभागियों ने Tobii Pro Glasses 2 नाम का मोबाइल आई-ट्रैकिंग चश्मा पहना था। इससे शोधकर्ताओं को यह रिकॉर्ड करने में मदद मिली कि बातचीत के दौरान प्रतिभागी किस दिशा में और कितनी बार देख रहा था।

इसके बाद प्रतिभागियों को एक ऐसी बातचीत में शामिल किया गया, जिसे वास्तविक ऑफिस के माहौल के करीब रखा गया था। इसमें कंपनी में नए कर्मचारी और लीडर के बीच नौकरी से जुड़े मुद्दों पर बातचीत और बातचीत के दौरान मोलभाव का माहौल बनाया गया।

प्रतिभागी को वास्तव में कर्मचारी की भूमिका दी गई थी, जबकि शोध टीम से जुड़े तीन लोगों ने बातचीत में अन्य भूमिकाएं निभाईं। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह देखना था कि वास्तविक जैसी सामाजिक स्थिति में कर्मचारी की नजरों का व्यवहार किस तरह बदलता है।

वेतन और नौकरी की शर्तों पर हुई बातचीत

अध्ययन में इस्तेमाल किए गए बातचीत के मॉडल में प्रतिभागियों को नौकरी से जुड़े मुआवजे पर बातचीत करनी थी। शोधकर्ताओं ने इस तरह की स्थिति इसलिए चुनी क्योंकि इसमें कर्मचारी को अपने तर्क सामने रखने और लीडर को प्रभावित करने की जरूरत होती है।

बातचीत के दौरान प्रतिभागियों की आंखों की गतिविधि रिकॉर्ड की गई। बाद में शोध टीम ने उनके व्यक्तित्व और बातचीत के दौरान दिखाई गई नजरों के बीच संबंध का विश्लेषण किया।

क्या आंखों में देखकर बात करना आपकी छवि बदल सकता है?

शोध के परिणामों के अनुसार, लीडर की आंखों की ओर अधिक नजर रखने वाले प्रतिभागियों को पर्यवेक्षकों ने अधिक कर्तव्यनिष्ठ माना। शोध में लीडर की आंखों की ओर देखने और प्रतिभागियों की self-rated conscientiousness के बीच सकारात्मक संबंध पाया गया। बातचीत के दौरान आंखों की ओर देखने और दूसरों की ओर से कर्तव्यनिष्ठ समझे जाने के बीच भी संबंध मिला।

शोधकर्ताओं का मानना है कि कर्मचारी अपनी नजरों के जरिए बिना कुछ कहे भी यह संकेत दे सकते हैं कि वे बातचीत में गंभीरता से शामिल हैं और अपनी बात को महत्व दे रहे हैं। खासकर लीडर से बातचीत में नजरों का इस्तेमाल उनके तर्क को मजबूत करने वाले व्यवहार के रूप में सामने आया।

लेकिन हर स्थिति में लगातार आंखों में देखना जरूरी नहीं

इस शोध का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि eye contact को सफलता का फॉर्मूला नहीं कहा गया है। आंखों में लगातार देखते रहना हर व्यक्ति या हर संस्कृति में समान अर्थ नहीं रखता। बातचीत का संदर्भ, सामाजिक स्थिति और व्यक्ति का स्वभाव भी नजरों के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है।

अध्ययन में सिर्फ 42 प्रतिभागियों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया था। इसलिए इसके परिणाम शुरुआती वैज्ञानिक प्रमाण के रूप में देखे जाने चाहिए, न कि इस आधार पर किसी कर्मचारी के व्यक्तित्व या काम करने की क्षमता का फैसला किया जाना चाहिए।

ऑफिस में आंखों की भाषा क्यों महत्वपूर्ण है?

आंखों का संपर्क बातचीत में ध्यान, भागीदारी और सामाजिक संबंध का संकेत दे सकता है। इस अध्ययन ने इसी व्यवहार को कर्मचारी और लीडर के बीच संबंध के संदर्भ में देखा है। शोधकर्ताओं के अनुसार, अब तक संगठनात्मक व्यवहार से जुड़े कई अध्ययनों में लीडर की नजर और उसके प्रभाव पर ज्यादा ध्यान दिया गया था। यह अध्ययन उस नजरिए को बदलकर कर्मचारी किस तरह अपनी नजरों के जरिए खुद को प्रस्तुत करता है, इस पर ध्यान देता है।

इसलिए अगली बार जब आप ऑफिस में अपने बॉस से बात करें, तो आंखों का संपर्क रखना बातचीत में आपकी मौजूदगी और ध्यान को दिखा सकता है। लेकिन केवल इसी आधार पर किसी व्यक्ति को जिम्मेदार, ईमानदार या सक्षम मान लेना सही नहीं होगा। किसी कर्मचारी की वास्तविक कार्यक्षमता को समझने के लिए उसके काम, व्यवहार और प्रदर्शन को व्यापक रूप से देखना जरूरी है।

Raish Ahmed

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