पोस्टमार्टम, चोटों की जांच और मौत की वजह का पता लगाने में होती है अहम भूमिका; MBBS के बाद फॉरेंसिक मेडिसिन में MD करना जरूरी
क्राइम से जुड़े मामलों में अक्सर ऐसे सवाल सामने आते हैं, जिनका जवाब मेडिकल जांच से मिलता है। किसी व्यक्ति की मौत कैसे हुई? शरीर पर मिले घाव किस तरह के हैं? चोट मौत से पहले लगी थी या बाद में? ऐसे सवालों के जवाब तलाशने में फॉरेंसिक डॉक्टर की भूमिका अहम होती है।
फॉरेंसिक डॉक्टर मेडिकल ज्ञान के आधार पर पोस्टमार्टम करते हैं, चोटों की जांच करते हैं और मौत के कारण का पता लगाने में मदद करते हैं। उनकी तैयार की गई रिपोर्ट पुलिस जांच और अदालत में महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकती है। मेडिकल और कानून के इस मेल में करियर बनाने के इच्छुक विद्यार्थी 12वीं के बाद फॉरेंसिक मेडिसिन का रास्ता चुन सकते हैं।
हालांकि, इस क्षेत्र में आने के लिए केवल फॉरेंसिक साइंस की पढ़ाई काफी नहीं है। फॉरेंसिक डॉक्टर बनने के लिए पहले MBBS और उसके बाद फॉरेंसिक मेडिसिन में विशेषज्ञता हासिल करनी होती है।
12वीं के बाद क्या करें?
फॉरेंसिक डॉक्टर बनने की तैयारी 12वीं कक्षा से शुरू होती है। इसके लिए विद्यार्थियों को 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी (PCB) विषयों के साथ पढ़ाई करनी चाहिए। इसके बाद मेडिकल की पढ़ाई में दाखिले के लिए राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) पास करना जरूरी है।
NEET-UG के स्कोर और निर्धारित काउंसलिंग प्रक्रिया के आधार पर सरकारी या निजी मेडिकल कॉलेज में MBBS की सीट मिलती है। मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए उम्मीदवारों को संबंधित वर्ष की पात्रता शर्तें और कटऑफ पूरी करनी होती हैं।
MBBS के बाद MD की पढ़ाई जरूरी
MBBS कोर्स की अवधि साढ़े चार साल होती है। इसके बाद एक साल की अनिवार्य रोटेटिंग मेडिकल इंटर्नशिप पूरी करनी होती है। इस तरह MBBS और इंटर्नशिप में कुल साढ़े पांच साल लगते हैं।
MBBS और इंटर्नशिप पूरी करने के बाद फॉरेंसिक मेडिसिन में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए MD (Forensic Medicine and Toxicology) किया जा सकता है। यह तीन साल का पोस्टग्रेजुएट कोर्स है।
इसमें दाखिले के लिए NEET-PG परीक्षा देनी होती है। NEET-PG में प्राप्त रैंक और काउंसलिंग के आधार पर मेडिकल कॉलेजों में MD की सीट मिलती है। इस कोर्स में विद्यार्थियों को पोस्टमार्टम, मेडिकल-कानूनी जांच, चोटों का अध्ययन, विष विज्ञान और फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार करने जैसे विषयों का प्रशिक्षण दिया जाता है।
फॉरेंसिक डॉक्टर का काम क्या होता है?
फॉरेंसिक डॉक्टर का काम मेडिकल जांच के जरिए उन तथ्यों को सामने लाना है, जो किसी आपराधिक या संदिग्ध मामले की जांच में मदद कर सकें। उनका सबसे महत्वपूर्ण काम पोस्टमार्टम करना और मौत के संभावित कारणों का पता लगाना है।
इसके अलावा वे शरीर पर मौजूद चोटों और घावों की प्रकृति का अध्ययन करते हैं। जरूरत पड़ने पर यह भी पता लगाने की कोशिश करते हैं कि चोट किस तरह लगी, उसका समय क्या हो सकता है और क्या उसका संबंध मौत से है। संदिग्ध मौत, हत्या, दुर्घटना और जहर से जुड़े मामलों में उनकी विशेषज्ञता उपयोगी होती है।
फॉरेंसिक डॉक्टर मेडिकल जांच के आधार पर रिपोर्ट तैयार करते हैं। जरूरत पड़ने पर उन्हें अदालत में विशेषज्ञ गवाह के रूप में अपनी राय और जांच के निष्कर्ष भी रखने पड़ सकते हैं। मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाने और शोध करने के अवसर भी इस क्षेत्र में उपलब्ध हैं।
फॉरेंसिक डॉक्टर और फॉरेंसिक साइंटिस्ट में क्या अंतर है?
कई विद्यार्थी फॉरेंसिक डॉक्टर और फॉरेंसिक साइंटिस्ट को एक ही पेशा समझ लेते हैं, जबकि दोनों की भूमिका और शैक्षणिक योग्यता अलग-अलग होती है।
फॉरेंसिक डॉक्टर एक प्रशिक्षित मेडिकल विशेषज्ञ होता है। वह पोस्टमार्टम, चोटों की मेडिकल जांच और मौत के कारण का पता लगाने जैसे काम करता है। इसके लिए MBBS के बाद फॉरेंसिक मेडिसिन में MD की पढ़ाई की जाती है।
दूसरी ओर, फॉरेंसिक साइंटिस्ट मुख्य रूप से वैज्ञानिक और प्रयोगशाला आधारित जांच करते हैं। वे DNA, फिंगरप्रिंट, बाल, खून के नमूने, रासायनिक पदार्थ और दूसरे सबूतों का विश्लेषण करते हैं। इस क्षेत्र में फॉरेंसिक साइंस या संबंधित विषय में स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्री के आधार पर करियर बनाया जा सकता है।
इसलिए जिस विद्यार्थी की रुचि पोस्टमार्टम और मेडिकल जांच में है, उसके लिए फॉरेंसिक मेडिसिन का रास्ता उपयुक्त है। वहीं, प्रयोगशाला में वैज्ञानिक सबूतों की जांच करने में रुचि रखने वाले विद्यार्थी फॉरेंसिक साइंस का विकल्प चुन सकते हैं।
कहां मिल सकती है नौकरी?
फॉरेंसिक मेडिसिन में MD पूरा करने के बाद सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों, अस्पतालों तथा संबंधित चिकित्सा संस्थानों में अवसर मिल सकते हैं। राज्य सरकारों के स्वास्थ्य विभागों और मेडिकल कॉलेजों में फॉरेंसिक मेडिसिन विशेषज्ञों की नियुक्ति हो सकती है।
इसके अलावा मेडिकल कॉलेजों में शिक्षण और शोध के क्षेत्र में भी करियर बनाया जा सकता है। अनुभव और निर्धारित योग्यता के आधार पर आगे चलकर वरिष्ठ शैक्षणिक और विशेषज्ञ पदों तक पहुंचने के अवसर मिलते हैं।
हालांकि, हर फॉरेंसिक विभाग या फॉरेंसिक साइंस लैब में फॉरेंसिक डॉक्टर के पद नहीं होते। किसी भी सरकारी भर्ती के लिए पद की शैक्षणिक योग्यता और अनुभव की शर्तें अलग-अलग हो सकती हैं।
हरियाणा की भर्ती से क्या समझें?
हरियाणा में वर्ष 2026 की शुरुआत में सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर (सीन ऑफ क्राइम) के 17 पदों पर भर्ती निकाली गई थी। इस पद के लिए फॉरेंसिक साइंस सहित कुछ निर्धारित विषयों में कम से कम द्वितीय श्रेणी की MSc डिग्री और तीन साल का शोध एवं विश्लेषण से जुड़ा अनुभव मांगा गया था। इसका वेतनमान पे मैट्रिक्स लेवल-9 के तहत 53,100 रुपये से 1,67,800 रुपये था।
यह भर्ती फॉरेंसिक डॉक्टर के पद के लिए नहीं थी, बल्कि फॉरेंसिक साइंस के विशेषज्ञों के लिए थी। इससे यह समझना जरूरी है कि फॉरेंसिक मेडिसिन और फॉरेंसिक साइंस में नौकरी की योग्यता अलग-अलग हो सकती है। इस भर्ती की आवेदन प्रक्रिया 18 फरवरी 2026 को समाप्त हो चुकी है। भविष्य में ऐसी भर्तियों के लिए संबंधित विभाग की आधिकारिक अधिसूचना देखनी चाहिए।
कितने साल में बन सकते हैं फॉरेंसिक डॉक्टर?
12वीं के बाद फॉरेंसिक डॉक्टर बनने के लिए सामान्य तौर पर करीब साढ़े आठ साल की पढ़ाई और प्रशिक्षण पूरा करना होता है। इसमें MBBS के साढ़े चार साल, एक साल की अनिवार्य इंटर्नशिप और फॉरेंसिक मेडिसिन में MD के तीन साल शामिल हैं।
इस अवधि में NEET-UG और NEET-PG की तैयारी, परीक्षा, काउंसलिंग और दाखिले के इंतजार में लगने वाला अतिरिक्त समय शामिल नहीं है। इसलिए वास्तविक समय इससे अधिक भी हो सकता है।
क्या यह करियर आपके लिए सही है?
फॉरेंसिक मेडिसिन उन विद्यार्थियों के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है, जिन्हें मेडिकल साइंस के साथ-साथ अपराध से जुड़े मामलों की वैज्ञानिक जांच में रुचि है। इस पेशे में काम करने के लिए मेडिकल ज्ञान, बारीकी से जांच करने की क्षमता, धैर्य और निष्पक्षता जरूरी है।
यह क्षेत्र केवल क्राइम से जुड़ी घटनाओं तक सीमित नहीं है। फॉरेंसिक डॉक्टर मेडिकल-कानूनी मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनकी विशेषज्ञ राय जांच एजेंसियों तथा न्यायिक प्रक्रिया के लिए उपयोगी होती है। हालांकि, इस करियर के लिए लंबी पढ़ाई, कठिन प्रशिक्षण और जिम्मेदारी के साथ काम करने की तैयारी जरूरी है।




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