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परीक्षा सुधार पर नंदन नीलेकणि पैनल को जनवरी 2027 तक का समय, मिले 50 हजार से ज्यादा सुझाव

देश में प्रतियोगी परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाले छह सदस्यीय हाई-पावर टास्क फोर्स को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए जनवरी 2027 तक का समय दिया गया है। पैनल को अब तक छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों, शैक्षणिक संस्थानों और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों से 50 हजार से अधिक सुझाव मिल चुके हैं।

इस टास्क फोर्स का गठन देश की परीक्षा व्यवस्था में सामने आई गंभीर गड़बड़ियों और पेपर लीक की घटनाओं के बाद किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की सुरक्षा मजबूत करना, परीक्षा प्रक्रिया में तकनीक का बेहतर इस्तेमाल करना और ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिससे पेपर लीक और दूसरी अनियमितताओं की आशंका कम हो सके।

क्यों बनाया गया परीक्षा सुधार टास्क फोर्स?

साल 2026 में NEET-UG परीक्षा को लेकर सामने आए पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के आरोपों ने देशभर में छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी थी। परीक्षा रद्द होने और दोबारा आयोजित किए जाने के बाद छात्रों ने विरोध प्रदर्शन भी किए। इस पूरे विवाद के बीच तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया था। इसके अगले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में हाई-पावर टास्क फोर्स बनाने की घोषणा की।

छह सदस्यीय इस पैनल को सार्वजनिक परीक्षाओं के आयोजन, सुरक्षा, परीक्षा के स्वरूप और संचालन व्यवस्था की समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसमें राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की ओर से आयोजित परीक्षाएं भी शामिल हैं।

सरकार ने इस टास्क फोर्स की प्रगति का ब्योरा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे के जरिए भी साझा किया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पैनल को अब तक 50 हजार से अधिक सुझाव मिले हैं। इनमें छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों, छात्र संगठनों, डॉक्टरों के समूहों, विशेषज्ञों और परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं की राय शामिल है। पैनल ने विभिन्न पक्षों के साथ बैठकें और परामर्श भी किए हैं।

कौन-कौन हैं टास्क फोर्स के सदस्य?

नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाले इस पैनल में तकनीक, अंतरिक्ष विज्ञान, सुरक्षा, शिक्षा और प्रशासन से जुड़े अनुभवी लोगों को शामिल किया गया है। इसके अन्य सदस्यों में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ, इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व निदेशक तपन डेका, IIT मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि, पूर्व शिक्षा सचिव अनिता करवाल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा शामिल हैं।

पैनल ने परीक्षा सुधारों पर सुझाव लेने के लिए इसरो के पूर्व अध्यक्ष के. राधाकृष्णन से भी चर्चा की है। राधाकृष्णन ने 2024 में NEET विवाद के बाद केंद्र सरकार की ओर से गठित विशेषज्ञ समिति की अध्यक्षता की थी। उस समिति ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार, सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई सुझाव दिए थे। बाद में इन सिफारिशों को लागू करने की प्रगति पर नजर रखने के लिए एक अलग उच्चस्तरीय संचालन समिति भी बनाई गई थी।

पेपर लीक रोकने के लिए क्या हो सकते हैं बदलाव?

नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाला पैनल परीक्षा में तकनीक के इस्तेमाल और प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के नए तरीकों पर विचार कर रहा है। इनमें सुरक्षित डिजिटल प्रश्न बैंक या ‘क्वेश्चन वॉल्ट’ तैयार करने का प्रस्ताव अहम है। इसके तहत विषय विशेषज्ञ पूरे साल बड़ी संख्या में प्रश्न तैयार करेंगे। इन प्रश्नों की जांच और सत्यापन के बाद उन्हें सुरक्षित डिजिटल व्यवस्था में रखा जाएगा।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पैनल एक लाख से अधिक प्रश्नों का बड़ा संग्रह तैयार करने और परीक्षा केंद्रों तक प्रश्नपत्र डिजिटल माध्यम से परीक्षा शुरू होने से कुछ समय पहले पहुंचाने जैसे विकल्पों पर भी विचार कर रहा है। इससे प्रश्नपत्रों को पहले से छापने, रखने और अलग-अलग केंद्रों तक पहुंचाने के दौरान लीक होने की आशंका कम करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, ये अभी विचाराधीन प्रस्ताव हैं। टास्क फोर्स ने अपनी अंतिम रिपोर्ट नहीं सौंपी है और न ही सरकार ने इन सभी व्यवस्थाओं को लागू करने का अंतिम फैसला किया है। इसी तरह, एआई की मदद से रियल-टाइम में प्रश्नपत्र तैयार करने को पैनल की तय सिफारिश बताना अभी सही नहीं होगा।

NEET का परीक्षा पैटर्न भी बदल सकता है

परीक्षा सुधारों के तहत NEET-UG को कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) में बदलने का मुद्दा भी चर्चा में है। मई 2026 में तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने घोषणा की थी कि NEET को अगले साल से कंप्यूटर आधारित तरीके से आयोजित किया जाएगा। हालांकि, बाद में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि परीक्षा के स्वरूप में बदलाव पर अंतिम फैसला नंदन नीलेकणि टास्क फोर्स की सिफारिशों और संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श के बाद लिया जाएगा।

ऐसे में NEET-UG 2027 के लिए कंप्यूटर आधारित परीक्षा को लेकर अभी आधिकारिक अंतिम पुष्टि का इंतजार करना जरूरी है। परीक्षा के एक चरण में होने या JEE की तरह कई चरणों में आयोजित किए जाने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया गया है। छात्रों को परीक्षा के मोड और पैटर्न से जुड़ी जानकारी के लिए NTA की आधिकारिक अधिसूचना पर भरोसा करना चाहिए।

जनवरी 2027 तक रिपोर्ट का इंतजार

सरकार ने पैनल को अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने के लिए जनवरी 2027 तक का समय दिया है। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से सुझाव दिया गया है कि सिफारिशों को अंतिम रूप देने से पहले राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मुख्य सचिवों से भी विचार-विमर्श किया जाए। इससे परीक्षा केंद्रों की उपलब्धता, तकनीकी सुविधाओं और अलग-अलग राज्यों की जरूरतों को समझने में मदद मिल सकती है।

टास्क फोर्स की सिफारिशें आने के बाद सरकार यह तय करेगी कि परीक्षा प्रणाली में किन बदलावों को किस तरह लागू किया जाए। छात्रों के लिए इस पूरी प्रक्रिया का महत्व इसलिए भी है क्योंकि NEET, JEE, CUET और दूसरी राष्ट्रीय परीक्षाओं में लाखों उम्मीदवार शामिल होते हैं। परीक्षा की सुरक्षा के साथ-साथ सभी छात्रों को समान अवसर देना और ग्रामीण व दूरदराज के क्षेत्रों में परीक्षा केंद्रों की पर्याप्त व्यवस्था करना भी बड़ी चुनौती है।

ऐसे में जनवरी 2027 में आने वाली रिपोर्ट से देश की परीक्षा व्यवस्था में बदलाव की दिशा साफ हो सकती है। हालांकि, पेपर लीक रोकने के लिए केवल तकनीक में बदलाव काफी नहीं होगा। परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही, केंद्रों की निगरानी, शिकायतों का समय पर समाधान और पारदर्शी व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी होगी।

Raish Ahmed

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