फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था और बढ़ते जीवन खर्च के खिलाफ छात्र प्रदर्शनों के बाद सरकार ने विश्वविद्यालयों में दाखिले की प्रक्रिया में बदलाव का ऐलान किया है। मौजूदा ऑनलाइन मंच पारकूरसुप (Parcoursup) को 2028 में नई व्यवस्था से बदला जाएगा, जबकि 2027 में भी इसमें बड़े बदलाव किए जाएंगे। छात्र बेहतर शिक्षा सुविधाओं, शिक्षकों की उपलब्धता और दाखिले में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
फ्रांस में कई हफ्तों से जारी छात्र प्रदर्शनों के बीच सरकार ने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों में दाखिले की व्यवस्था बदलने का फैसला किया है। सरकार के मुताबिक, दाखिले के लिए इस्तेमाल होने वाले मौजूदा ऑनलाइन मंच को 2028 में बदल दिया जाएगा। इससे पहले, 2027 में वर्तमान व्यवस्था में बड़े सुधार किए जाएंगे।
सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य दाखिले की प्रक्रिया को बेहतर बनाना और छात्रों की शिकायतों को दूर करना है। फ्रांस में विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा के कई पाठ्यक्रमों में आवेदन के लिए पारकूरसुप (Parcoursup) नाम के ऑनलाइन मंच का इस्तेमाल किया जाता है। इसके जरिए छात्र अपनी पसंद के पाठ्यक्रमों और संस्थानों में दाखिले के लिए आवेदन करते हैं।
हालांकि, इस व्यवस्था को लेकर छात्रों में लंबे समय से असंतोष है। छात्रों का कहना है कि दाखिले के लिए चयन किन आधारों पर किया जाता है, इसकी जानकारी पर्याप्त रूप से स्पष्ट नहीं होती। इसके अलावा, अपनी पसंद के पाठ्यक्रमों में दाखिले के समान अवसर मिलने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालिया आंदोलन में दाखिला प्रक्रिया में सुधार की मांग प्रमुख मुद्दों में शामिल रही है।
छात्र प्रदर्शनों के बाद सरकार पर क्यों बढ़ा दबाव?
फ्रांस में 17 अक्टूबर को शिक्षा पर सरकारी खर्च और बढ़ते जीवन खर्च के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान कई जगह हिंसा की घटनाएं सामने आईं। देश के अलग-अलग हिस्सों में आगजनी, लूटपाट और पुलिस के साथ झड़पों की खबरें आईं। प्रदर्शनकारियों ने कुछ सार्वजनिक इमारतों को भी निशाना बनाया, जिनमें मार्सेई का नगर भवन शामिल था। दुकानों में तोड़फोड़, लूटपाट और आग लगाने की घटनाएं भी दर्ज की गईं।
इसके बाद शनिवार को देशभर में एक और प्रदर्शन हुआ, जिसमें पहले के मुकाबले हिंसा कम रही। अधिकारियों के अनुसार, इस प्रदर्शन में चार लाख से अधिक लोग शामिल हुए, जबकि आयोजकों ने करीब आठ लाख लोगों के शामिल होने का दावा किया।
इन प्रदर्शनों ने शिक्षा व्यवस्था, सरकारी खर्च और आम लोगों पर बढ़ते आर्थिक दबाव से जुड़े मुद्दों को फिर चर्चा में ला दिया। छात्रों की मांगों के बीच सरकार ने विश्वविद्यालयों में दाखिले की प्रक्रिया में सुधार करने की घोषणा की।
राष्ट्रपति मैक्रों ने छात्रों की मांगों पर क्या कहा?
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोमवार को दक्षिणी बंदरगाह शहर मार्सेई के दौरे के दौरान छात्रों की मांगों पर कदम उठाने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि सरकार को आंदोलन के पीछे मौजूद जायज मांगों पर काम करने के लिए कहा गया है।
उच्च शिक्षा मंत्री फिलिप बैप्टिस्ट ने भी घोषणा की कि 2027 में दाखिला प्रणाली में बड़े बदलाव किए जाएंगे। इसके बाद 2028 में पारकूरसुप की जगह नई व्यवस्था लागू करने की योजना है।
प्रधानमंत्री सेबास्तियां लेकोर्नू ने भी इस घोषणा से पहले स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्र प्रतिनिधियों से मुलाकात की। सरकार के इन कदमों को छात्रों की शिकायतों का समाधान खोजने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
दाखिले के अलावा छात्र क्या बदलाव चाहते हैं?
फ्रांस में छात्र आंदोलन केवल विश्वविद्यालयों में दाखिले की प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। प्रदर्शनकारी स्कूलों में बेहतर सुविधाएं, शिक्षकों की कमी दूर करने और पढ़ाई के माहौल में सुधार की मांग भी कर रहे हैं।
छात्रों की प्रमुख मांगों में स्कूलों की पुरानी इमारतों की मरम्मत, कक्षाओं में विद्यार्थियों की संख्या कम करना और शिक्षकों की अनुपस्थिति के कारण पढ़ाई प्रभावित होने से रोकना शामिल है। उनका कहना है कि यदि कोई शिक्षक छुट्टी पर है या उपलब्ध नहीं है, तो उसकी जगह दूसरे शिक्षक की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि छात्रों की पढ़ाई जारी रह सके।
सरकार ने 8 अक्टूबर को उन माध्यमिक स्कूलों में तीन हजार अतिरिक्त अस्थायी शिक्षकों की नियुक्ति करने की घोषणा की थी, जहां शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
छात्रों का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए केवल दाखिले के नियम बदलना पर्याप्त नहीं है। स्कूलों में जरूरी संसाधन उपलब्ध कराना, शिक्षकों की कमी दूर करना और सभी विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा के अवसर देना भी जरूरी है।
आर्थिक संकट के बीच जारी है छात्र आंदोलन
फ्रांस में यह आंदोलन ऐसे समय में हो रहा है, जब देश में बढ़ते जीवन खर्च और सरकारी वित्तीय दबाव को लेकर चिंता बनी हुई है। गरीबी और सरकारी कर्ज के ऊंचे स्तर ने भी आर्थिक हालात को लेकर बहस तेज की है।
छात्रों के लिए रहने, पढ़ने और रोजमर्रा की जरूरतों पर होने वाला खर्च एक बड़ी चिंता है। ऐसे में वे शिक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ-साथ सरकार से शिक्षा के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध कराने की मांग भी कर रहे हैं।
विश्वविद्यालयों में दाखिले की प्रक्रिया में बदलाव की घोषणा सरकार की ओर से उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन छात्रों की अन्य मांगों पर कितना और कब तक काम होगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
फ्रांस में छात्र प्रदर्शनों के बाद सरकार ने विश्वविद्यालयों में दाखिले की व्यवस्था बदलने की योजना बनाई है। इसके तहत 2027 में मौजूदा पारकूरसुप प्रणाली में बड़े बदलाव किए जाएंगे और 2028 में उसकी जगह नई व्यवस्था लाने का प्रस्ताव है।
हालांकि, छात्रों की मांगें दाखिले की प्रक्रिया से कहीं आगे तक जाती हैं। बेहतर स्कूल सुविधाएं, शिक्षकों की उपलब्धता, कम विद्यार्थियों वाली कक्षाएं और शिक्षा पर पर्याप्त सरकारी खर्च भी इस आंदोलन के प्रमुख मुद्दे हैं। आने वाले समय में सरकार इन मांगों पर किस तरह कार्रवाई करती है, इसका असर फ्रांस की उच्च शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के भविष्य पर पड़ सकता है।




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