110 छात्रों को अब तक नहीं मिली फीस, 22 को आंशिक रिफंड; इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट के विद्यार्थी सबसे ज्यादा प्रभावित
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने कर्नाटक के 78 कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को छात्रों की फीस वापस नहीं करने के मामलों में चिह्नित किया है। ये वे संस्थान हैं, जहां दाखिला रद्द कराने के बाद भी छात्रों को तय समय के भीतर फीस वापस नहीं मिली। आयोग ने इस मामले में कर्नाटक के राज्यपाल कार्यालय से हस्तक्षेप करने की मांग की है, ताकि संबंधित उच्च शिक्षण संस्थान फीस वापसी के नियमों का पालन करें और लंबित शिकायतों का समाधान करें।
रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक में फीस वापसी से जुड़ी कुल 132 शिकायतें अब भी लंबित हैं। इनमें से 110 छात्रों को कोई रिफंड नहीं मिला है, जबकि 22 छात्रों को फीस की केवल कुछ राशि वापस की गई है। ये शिकायतें वर्ष 2020 से 2025 के बीच की हैं।
आयोग के मुताबिक, छात्रों की शिकायतें संबंधित संस्थानों तक पहुंचाने और बैठकें करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका। अब UGC ने राज्यपाल कार्यालय से हस्तक्षेप करने को कहा है, ताकि संस्थान तय नियमों के अनुसार छात्रों की फीस लौटाएं।
इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट के छात्र सबसे ज्यादा प्रभावित
कर्नाटक में फीस वापसी से जुड़ी लंबित शिकायतों में इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों की संख्या काफी अधिक है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इंजीनियरिंग के छात्रों की 2 लाख रुपये से लेकर 8.3 लाख रुपये तक की फीस वापस नहीं की गई है। इनमें कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग, एयरोस्पेस इंजीनियरिंग और मैकेनिकल इंजीनियरिंग जैसे पाठ्यक्रम शामिल हैं।
मैनेजमेंट से जुड़े पाठ्यक्रम भी फीस वापसी की शिकायतों में दूसरे स्थान पर हैं। MBA, PGDM और BBA के विद्यार्थियों की 2.9 लाख रुपये से लेकर 6.5 लाख रुपये तक की फीस लंबित बताई गई है।
इसके अलावा कानून और उससे जुड़े स्वास्थ्य विज्ञान के पाठ्यक्रमों में भी फीस वापसी के मामले सामने आए हैं। इन पाठ्यक्रमों में अलग-अलग छात्रों की 2.7 लाख रुपये से 3.1 लाख रुपये तक की रकम वापस नहीं की गई है।
एक मामले में डीम्ड-टू-बी विश्वविद्यालय के खिलाफ फीस वापसी की चार शिकायतें लंबित हैं। इनकी कुल रकम 15.5 लाख रुपये है। इनमें कंप्यूटर साइंस पाठ्यक्रम में दाखिला रद्द कराने वाली एक छात्रा के 8 लाख रुपये वापस किए जाने बाकी हैं। एक अन्य डीम्ड-टू-बी विश्वविद्यालय के खिलाफ भी 13 अलग-अलग शिकायतें दर्ज हैं।
कॉलेज दाखिला रद्द होने पर फीस लौटाने से क्यों बचते हैं?
कुछ निजी कॉलेजों ने फीस वापस नहीं करने की वजह दाखिले रद्द होने से होने वाले आर्थिक नुकसान को बताया है।
कर्नाटक प्राइवेट पोस्ट-ग्रेजुएट कॉलेज एसोसिएशन के सचिव एम. प्रकाश के मुताबिक, कई बार छात्र किसी कॉलेज में दाखिला लेने के बाद दूसरे संस्थान से बेहतर अवसर मिलने पर अपनी सीट छोड़ देते हैं। ऐसी स्थिति में कॉलेजों के लिए अंतिम समय में उस सीट पर किसी दूसरे छात्र को दाखिला देना मुश्किल हो जाता है।
उन्होंने कहा कि सीट खाली रहने से कॉलेजों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। पाठ्यक्रम की अवधि के आधार पर यह सीट दो साल या उससे अधिक समय तक खाली रह सकती है। इसी वजह से कई कॉलेज फीस लौटाने से बचते हैं।
हालांकि, प्रकाश का कहना है कि यदि कॉलेज खाली हुई सीट पर किसी दूसरे छात्र को दाखिला देने में सफल रहता है, तो उसे पहले छात्र की फीस वापस कर देनी चाहिए।
दूसरी ओर, UGC के नियमों के अनुसार, उच्च शिक्षण संस्थानों को दाखिला रद्द कराने के समय के आधार पर तय फीस वापसी नीति का पालन करना जरूरी है। संस्थान अपनी सुविधा के अनुसार इन नियमों की अनदेखी नहीं कर सकते।
UGC के फीस वापसी नियम: छात्रों को कितनी फीस मिलेगी वापस?
UGC ने कॉलेज या विश्वविद्यालय का पाठ्यक्रम छोड़ने अथवा दाखिला रद्द कराने वाले छात्रों के लिए फीस वापसी के नियम तय किए हैं। इसके तहत छात्र को कितनी फीस वापस मिलेगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि उसने दाखिला रद्द कराने की सूचना संस्थान को अंतिम प्रवेश तिथि के मुकाबले कब दी है।
| दाखिला रद्द कराने की सूचना देने का समय | फीस वापसी |
| प्रवेश की अंतिम तारीख से 15 दिन या उससे पहले | 100% |
| प्रवेश की अंतिम तारीख से 15 दिन से कम समय पहले | 90% |
| प्रवेश की अंतिम तारीख के 15 दिन के भीतर | 80% |
| अंतिम तारीख के 15 दिन बाद से 30 दिन के भीतर | 50% |
| अंतिम तारीख के 30 दिन बाद | कोई रिफंड नहीं |
ये नियम UGC की फीस वापसी नीति के तहत लागू होते हैं। शैक्षणिक सत्र 2024-25 के लिए आयोग ने कुछ विशेष छूट भी दी थी। इसके तहत 30 सितंबर 2024 तक दाखिला रद्द कराने पर पूरी फीस लौटाने और 31 अक्टूबर 2024 तक अधिकतम 1,000 रुपये प्रोसेसिंग शुल्क काटकर फीस वापस करने का प्रावधान था। इसके बाद शुरू होने या आगे बढ़ने वाली प्रवेश प्रक्रिया के लिए अक्टूबर 2018 की फीस वापसी अधिसूचना के प्रावधान लागू किए गए।
छात्रों को अपने दाखिले के शैक्षणिक सत्र और संबंधित संस्थान पर लागू UGC की अधिसूचना जरूर देखनी चाहिए, क्योंकि फीस वापसी की समय-सीमा और लागू प्रावधान संबंधित प्रवेश कार्यक्रम के अनुसार समझना जरूरी है।
UGC की कार्रवाई से छात्रों को क्या फायदा हो सकता है?
इस मामले में UGC का हस्तक्षेप छात्रों के आर्थिक अधिकारों और फीस वापसी के नियमों के पालन को लेकर महत्वपूर्ण है। कॉलेज या विश्वविद्यालय में दाखिला लेने के बाद किसी दूसरे संस्थान से बेहतर अवसर मिलने पर छात्र पहले संस्थान से अपना दाखिला रद्द करा सकते हैं। ऐसी स्थिति में संबंधित संस्थान को UGC की लागू फीस वापसी नीति के अनुसार कार्रवाई करनी होती है।
फीस लौटाने में देरी होने से छात्रों और उनके परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। कई बार दूसरे कॉलेज में दाखिला लेने के लिए छात्रों को अतिरिक्त फीस का इंतजाम करना पड़ता है। ऐसे में पहले संस्थान से समय पर रिफंड मिलना जरूरी हो जाता है।
यह मामला कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के लिए भी स्पष्ट संदेश है कि दाखिला रद्द करने और फीस वापस करने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। छात्रों की शिकायतों का तय समय में समाधान किया जाना चाहिए।
UGC ने फीस वापसी के नियमों को प्रभावी ढंग से लागू कराने के लिए राज्यपाल कार्यालय से हस्तक्षेप की मांग की है। अब देखना होगा कि संबंधित संस्थान लंबित शिकायतों का निपटारा कब तक करते हैं और प्रभावित छात्रों को उनकी फीस कब वापस मिलती है।




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