नीट पीजी (NEET PG) परीक्षा में पारदर्शिता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) की मौजूदा नीति पर सवाल उठाए हैं। अदालत ने पूछा है कि परीक्षा के वास्तविक प्रश्नपत्र अभ्यर्थियों को उपलब्ध कराने में बोर्ड को क्या परेशानी है और इससे परीक्षा की विश्वसनीयता कैसे प्रभावित हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने NBEMS को इस संबंध में विस्तृत लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
सोमवार, 2 नवंबर 2026 को न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि बोर्ड को अपनी नीति के पीछे ठोस कारण बताने होंगे। अदालत यह जानना चाहती है कि यदि अभ्यर्थियों को परीक्षा में पूछे गए वास्तविक प्रश्नों और उनके उत्तरों की जानकारी दी जाती है, तो इससे भविष्य की परीक्षाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर किस तरह असर पड़ सकता है।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने पारदर्शिता के महत्व पर सवाल उठाते हुए कहा, “पारदर्शिता का क्या होगा? आप जो कर रहे हैं, उसके बारे में आपको और विस्तार से समझाना होगा।” पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि वह NBEMS की मौजूदा नीति से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है।
क्या है पूरा मामला? NEET PG आंसर-की और प्रश्नपत्र सार्वजनिक करने की मांग
सुप्रीम कोर्ट में नीट पीजी परीक्षा से जुड़े कई मामलों की एक साथ सुनवाई हो रही है। इन याचिकाओं में परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने और अभ्यर्थियों को उनके मूल्यांकन से संबंधित पूरी जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
मेडिकल एस्पिरेंट्स और डॉक्टरों की ओर से दाखिल याचिकाओं में मांग की गई है कि परीक्षा के बाद प्रत्येक अभ्यर्थी को उसके द्वारा हल किए गए वास्तविक प्रश्नपत्र, उत्तर के विकल्प, आधिकारिक आंसर-की और उसके दर्ज किए गए जवाब उपलब्ध कराए जाएं। इससे अभ्यर्थी अपने उत्तरों का मिलान कर सकेंगे और यह समझ पाएंगे कि उन्हें किस आधार पर अंक दिए गए हैं।
मामले में डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन (DMA) की याचिका भी शामिल है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि केवल प्रश्नों की पहचान संख्या (Question ID) और उत्तर से जुड़ी जानकारी देना पर्याप्त नहीं है। अभ्यर्थियों को वास्तविक प्रश्न और उनके विकल्प भी देखने का अधिकार मिलना चाहिए, ताकि वे अपने मूल्यांकन की स्वतंत्र रूप से जांच कर सकें।
इससे पहले 15 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग से जुड़ी याचिका पर नोटिस जारी किया था। अब 2 नवंबर की सुनवाई में अदालत ने NBEMS से उसकी नीति पर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है।
NBEMS प्रश्नपत्र सार्वजनिक करने के खिलाफ क्यों है?
सुनवाई के दौरान NBEMS की ओर से पेश वकील ने प्रश्नपत्र सार्वजनिक नहीं करने के पीछे कई तर्क दिए। बोर्ड का कहना है कि स्नातकोत्तर मेडिकल प्रवेश परीक्षा के लिए प्रश्नों का भंडार सीमित है। इन प्रश्नों को तैयार करने के लिए देशभर के विशेषज्ञों की मदद ली जाती है। इसलिए प्रश्न बैंक को राष्ट्रीय संपत्ति की तरह सुरक्षित रखना जरूरी है।
NBEMS की ओर से दलील दी गई कि यदि हर साल परीक्षा में पूछे गए सभी प्रश्न सार्वजनिक कर दिए जाएंगे, तो अगले पांच से छह वर्षों में प्रश्न बैंक के अधिकांश प्रश्न सामने आ जाएंगे। इससे भविष्य की परीक्षाओं के लिए नए और बेहतर प्रश्न तैयार करना मुश्किल हो सकता है।
बोर्ड के वकील ने यह भी बताया कि वर्तमान व्यवस्था में अभ्यर्थियों को उनके लॉगिन के माध्यम से प्रश्नों की पहचान संख्या, उनके जवाब की स्थिति और सही उत्तर की जानकारी दी जाती है। हालांकि, वास्तविक प्रश्न सार्वजनिक नहीं किए जाते।
NBEMS का तर्क है कि प्रश्नों को गोपनीय रखने से परीक्षा के स्तर और भविष्य में प्रश्नों की उपलब्धता को बनाए रखने में मदद मिलती है।
अमेजन पर बिक रहे पुराने प्रश्नपत्रों का भी उठा मुद्दा
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश एक अन्य वकील ने NBEMS की दलीलों पर सवाल उठाया। उन्होंने अदालत को बताया कि पिछले वर्षों के NEET PG प्रश्नपत्र अमेजन पर बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। ऐसे में जब पुराने प्रश्नपत्र बाजार में बेचे जा रहे हैं, तो परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था को वास्तविक प्रश्न सार्वजनिक करने में क्या परेशानी है?
इस दलील के जरिए बोर्ड की गोपनीयता संबंधी नीति पर सवाल उठाया गया। हालांकि, अमेजन पर प्रश्नपत्रों की उपलब्धता का यह दावा सुनवाई के दौरान वकील की ओर से रखा गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने पारदर्शिता को लेकर क्या कहा?
NBEMS की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल प्रश्न बैंक सीमित होने की बात कहकर प्रश्नपत्र सार्वजनिक नहीं करने के फैसले को उचित नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने बोर्ड से पूछा कि वह दूसरी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं से अलग नीति क्यों अपना रहा है।
न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा ने कहा कि अदालत बोर्ड के मौजूदा रुख से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। उसे विस्तार से बताना होगा कि वास्तविक प्रश्नों का खुलासा करने से परीक्षा की विश्वसनीयता को किस तरह नुकसान पहुंच सकता है।
पीठ ने यह भी संकेत दिया कि दूसरी परीक्षाओं में अपनाई जाने वाली पारदर्शी व्यवस्था से अलग रास्ता चुनने के लिए NBEMS को ठोस वजह बतानी होगी।
अदालत की टिप्पणी से साफ है कि वह परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने और अभ्यर्थियों को उनके मूल्यांकन की पूरी जानकारी देने, दोनों पहलुओं के बीच संतुलन चाहती है।
NEET PG अभ्यर्थियों के लिए क्या मायने रखता है सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश?
सुप्रीम कोर्ट का यह रुख NEET PG अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण है। यदि भविष्य में परीक्षा के वास्तविक प्रश्नपत्र, उत्तर के विकल्प और अभ्यर्थियों के दर्ज जवाब उपलब्ध कराने का फैसला होता है, तो इससे उम्मीदवार अपने प्रदर्शन का बेहतर आकलन कर सकेंगे।
इससे परीक्षा के मूल्यांकन में संभावित गलतियों को सामने लाने और अभ्यर्थियों की शिकायतों का समाधान करने में भी मदद मिल सकती है। खासकर उन उम्मीदवारों के लिए यह व्यवस्था उपयोगी होगी, जिन्हें अपने प्राप्त अंकों या किसी प्रश्न के सही उत्तर को लेकर संदेह है।
हालांकि, अभी यह समझना जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट ने NBEMS को प्रश्नपत्र और पूरी आंसर-की सार्वजनिक करने का अंतिम आदेश नहीं दिया है। फिलहाल बोर्ड से केवल यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि प्रश्नों का खुलासा करने से परीक्षा की विश्वसनीयता कैसे प्रभावित हो सकती है।
अब आगे की सुनवाई में NBEMS के लिखित जवाब और उसके द्वारा दिए गए तर्कों पर विचार किया जाएगा। इस मामले में अदालत का अंतिम फैसला यह तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है कि NEET PG जैसी राष्ट्रीय स्तर की मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता और प्रश्नपत्रों की गोपनीयता के बीच किस तरह संतुलन बनाया जाए।




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