भारत की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान करीब 14.67 लाख स्कूलों में 24.72 करोड़ से अधिक छात्रों का नामांकन दर्ज किया गया। वहीं, छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) सुधरकर 24:1 हो गया। शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (UDISE+) 2025-26 की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
17 अगस्त 2026 की तारीख वाली इस रिपोर्ट में छात्रों के नामांकन, शिक्षकों की उपलब्धता, स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और लड़के-लड़कियों की भागीदारी में सुधार को रेखांकित किया गया है। हालांकि, माध्यमिक स्तर पर छात्रों को पढ़ाई जारी रखने के मामले में अब भी चुनौती बनी हुई है। इस स्तर पर छात्रों के ठहराव की दर 51.9% रही, जबकि बुनियादी शिक्षा स्तर पर यह 98.5% दर्ज की गई।
रिपोर्ट के अनुसार, शैक्षणिक सत्र के दौरान देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में करीब 1.03 करोड़ शिक्षक कार्यरत थे। इस हिसाब से प्रत्येक स्कूल में औसतन सात शिक्षक और 169 छात्र थे। देश में कुल छात्र-शिक्षक अनुपात 24:1 रहा, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में निर्धारित 30:1 के मानक से बेहतर है।
माध्यमिक शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात 71.7%
रिपोर्ट के अनुसार, माध्यमिक शिक्षा स्तर पर सकल नामांकन अनुपात (GER) 71.7% रहा, जबकि मिडिल स्तर पर यह 89.6% दर्ज किया गया।
कुल छात्र नामांकन में माध्यमिक स्तर की हिस्सेदारी 27.16% रही। इसके बाद प्रारंभिक तैयारी के स्तर (प्रिपरेटरी स्टेज) की हिस्सेदारी 25.60%, मिडिल स्तर की 25.58% और बुनियादी शिक्षा स्तर (फाउंडेशनल स्टेज) की 21.66% रही।
अलग-अलग शैक्षणिक स्तरों पर छात्र-शिक्षक अनुपात के आंकड़े भी शिक्षकों की उपलब्धता में अंतर दिखाते हैं। बुनियादी शिक्षा स्तर पर यह अनुपात 10:1 रहा। प्रिपरेटरी स्तर पर 12:1, मिडिल स्तर पर 17:1 और माध्यमिक स्तर पर 21:1 दर्ज किया गया।
माध्यमिक स्तर पर छात्रों का पढ़ाई छोड़ना अब भी चिंता का विषय
UDISE+ रिपोर्ट के अनुसार, माध्यमिक स्तर पर छात्रों के पढ़ाई जारी रखने की दर 51.9% रही। इसके मुकाबले बुनियादी शिक्षा स्तर पर यह दर 98.5%, प्रिपरेटरी स्तर पर 91.1% और मिडिल स्तर पर 83.7% दर्ज की गई।
पढ़ाई बीच में छोड़ने यानी ड्रॉपआउट दर की बात करें तो माध्यमिक स्तर पर यह 7%, मिडिल स्तर पर 3.6% और प्रिपरेटरी स्तर पर 1.8% रही।
रिपोर्ट के अनुसार, 2022-23 की तुलना में सभी शैक्षणिक स्तरों पर ड्रॉपआउट दर में गिरावट आई है। इसके बावजूद माध्यमिक स्तर पर छात्रों को स्कूल में बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
एक शैक्षणिक स्तर से अगले स्तर पर पहुंचने की दर भी अलग-अलग रही। बुनियादी शिक्षा से प्रिपरेटरी स्तर पर जाने की दर 99.2%, प्रिपरेटरी से मिडिल स्तर पर 93.8% और मिडिल से माध्यमिक स्तर पर जाने की दर 88.3% रही।
एकल शिक्षक वाले स्कूलों की संख्या में 3% की गिरावट
रिपोर्ट के मुताबिक, केवल एक शिक्षक के भरोसे चलने वाले स्कूलों की संख्या में करीब 3% की कमी आई है। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में ऐसे स्कूलों की संख्या घटकर 1,00,843 रह गई।
वहीं, ऐसे स्कूलों की संख्या में भी कमी दर्ज की गई, जहां किसी छात्र का नामांकन नहीं था। पिछले शैक्षणिक सत्र की तुलना में ऐसे स्कूलों की संख्या 29% घटकर 5,663 रह गई।
ये आंकड़े देश में शिक्षकों की तैनाती और स्कूलों में नामांकन की स्थिति में आए बदलाव को दर्शाते हैं। हालांकि, एक शिक्षक वाले स्कूलों की संख्या अब भी काफी अधिक है।
स्कूलों में 48.4% छात्राएं, शिक्षकों में महिलाओं की हिस्सेदारी 54.9%
देश के स्कूलों में कुल नामांकन में लड़कियों की हिस्सेदारी 48.4% रही। वहीं, शिक्षण कार्य से जुड़े कुल कर्मचारियों में महिलाओं की हिस्सेदारी 54.9% दर्ज की गई। ये आंकड़े स्कूली शिक्षा व्यवस्था में महिलाओं और लड़कियों की महत्वपूर्ण भागीदारी को दर्शाते हैं।
सामाजिक वर्गों के आधार पर देखें तो अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों की हिस्सेदारी कुल नामांकन में 44.9% रही। सामान्य वर्ग के छात्रों की हिस्सेदारी 27.5%, अनुसूचित जाति (SC) की 17.7% और अनुसूचित जनजाति (ST) की 10% दर्ज की गई।
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों को मिलाकर कुल नामांकन में उनकी हिस्सेदारी 27.7% रही।
विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CwSN) में लड़कों की हिस्सेदारी 57.16% और लड़कियों की हिस्सेदारी 42.84% दर्ज की गई।
67.4% स्कूलों में इंटरनेट की सुविधा
UDISE+ रिपोर्ट में स्कूलों की डिजिटल सुविधाओं और बुनियादी ढांचे में सुधार की जानकारी भी दी गई है। देश के 69.9% स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधा उपलब्ध थी, जबकि 67.4% स्कूलों में इंटरनेट कनेक्शन था।
बुनियादी सुविधाओं के मामले में 95% स्कूलों में बिजली कनेक्शन और 99.5% स्कूलों में सुरक्षित पेयजल की सुविधा उपलब्ध थी। लड़कियों के लिए शौचालय 98.5% स्कूलों में और लड़कों के लिए शौचालय 97.2% स्कूलों में मौजूद थे। हाथ धोने की सुविधा 96.9% स्कूलों में थी, जबकि 90.5% स्कूलों में पुस्तकालय उपलब्ध थे।
हालांकि, दिव्यांग और विशेष जरूरतों वाले छात्रों की पहुंच को आसान बनाने के लिए बुनियादी ढांचे में अभी और सुधार की जरूरत है। रिपोर्ट के अनुसार, केवल 58.2% स्कूलों में हैंडरेल यानी सहारे के लिए रेलिंग वाले रैंप उपलब्ध थे। वहीं, वर्षा जल संचयन की सुविधा 29.9% स्कूलों में दर्ज की गई।
स्कूली शिक्षा की स्थिति पर नजर रखने का राष्ट्रीय डेटाबेस है UDISE+
UDISE+ प्लेटफॉर्म को स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने विकसित किया है। इसका उद्देश्य देशभर के स्कूलों से जुड़े आंकड़ों को एकत्र करना, स्कूली शिक्षा की स्थिति पर नजर रखना और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर शिक्षा संबंधी नीतियां बनाने में मदद करना है।
UDISE+ 2025-26 की रिपोर्ट देश में स्कूली शिक्षा तक पहुंच, समावेशी शिक्षा, बुनियादी सुविधाओं और छात्रों की भागीदारी में हुई प्रगति का व्यापक आकलन प्रस्तुत करती है। इसके निष्कर्ष राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के उद्देश्यों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण हैं।
रिपोर्ट में नामांकन और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। इसके बावजूद माध्यमिक स्तर पर छात्रों को पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करना, एकल शिक्षक वाले स्कूलों की समस्या दूर करना और दिव्यांग छात्रों के लिए सुविधाओं का विस्तार करना शिक्षा व्यवस्था के सामने महत्वपूर्ण चुनौतियां बनी हुई हैं।



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