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भारत-न्यूजीलैंड FTA लागू: भारतीयों को मिलेंगे नए वर्क वीजा, पीएचडी के बाद 4 साल तक काम का मौका

भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 20 अक्टूबर 2026 से लागू हो गया है। व्यापार पर शुल्क में कटौती के साथ इस समझौते में भारतीय नागरिकों के लिए वीजा के नए रास्ते भी खोले गए हैं। इसके तहत कुछ पेशेवरों को तीन साल तक काम करने का अवसर मिलेगा, न्यूजीलैंड से पीएचडी करने वाले भारतीय विद्यार्थियों को पढ़ाई के बाद चार साल तक काम करने का वीजा मिल सकेगा और युवाओं के लिए वर्किंग हॉलिडे योजना भी शुरू की जाएगी।

न्यूजीलैंड के आव्रजन विभाग (Immigration New Zealand) के अनुसार, इन नई सुविधाओं का उद्देश्य देश की आर्थिक जरूरतों और रोजगार बाजार के लिए कुशल लोगों की उपलब्धता बढ़ाना है।

कुशल पेशेवरों के लिए नए वर्क वीजा

अक्टूबर 2026 से इस समझौते के तहत टेम्पररी एम्प्लॉयमेंट एंट्री (TEE) वीजा की दो नई श्रेणियां शुरू की गई हैं। इनमें एक श्रेणी अत्यधिक कुशल पेशेवरों के लिए है, जबकि दूसरी भारत से जुड़े कुछ खास पेशों के लिए बनाई गई है।

इन दोनों श्रेणियों के तहत किसी भी समय न्यूजीलैंड में अधिकतम 5,000 वीजा धारक रह सकेंगे। इनमें से ज्यादातर अवसर उन कुशल पेशों के लिए रखे गए हैं, जिन्हें न्यूजीलैंड की ग्रीन लिस्ट में शामिल किया गया है।

हालांकि, वीजा पाने के लिए आवेदकों को न्यूजीलैंड के सामान्य आव्रजन नियमों का पालन करना होगा। उनके पास मान्यता प्राप्त नियोक्ता की ओर से योग्य नौकरी का प्रस्ताव होना चाहिए। इसके अलावा संबंधित शैक्षणिक योग्यता, अंग्रेजी भाषा की निर्धारित शर्तें और स्वास्थ्य, चरित्र तथा पहचान से जुड़ी जांच पूरी करना भी जरूरी होगा।

TEE वीजा अधिकतम तीन साल के लिए मान्य होंगे। इन वीजा के आधार पर न्यूजीलैंड में स्थायी निवास (रेजिडेंसी) पाने का रास्ता नहीं मिलेगा।

इंडिया आइकॉनिक वर्क वीजा: योग प्रशिक्षक से आयुष विशेषज्ञ तक को मौका

नई व्यवस्था के तहत इंडिया आइकॉनिक वर्क वीजा (India Iconic Work Visa) शुरू किया गया है। यह वीजा उन भारतीय नागरिकों के लिए है, जिन्हें न्यूजीलैंड में योग प्रशिक्षक, भारतीय शेफ, संगीत शिक्षक या आयुष विशेषज्ञ के रूप में पूर्णकालिक नौकरी का प्रस्ताव मिला हो।

इस श्रेणी में किसी भी समय अधिकतम 600 लोग न्यूजीलैंड में काम कर सकेंगे। इनमें 100 योग प्रशिक्षक, 250 भारतीय शेफ, 50 संगीत शिक्षक और 200 आयुष विशेषज्ञ शामिल हो सकते हैं। 20 अक्टूबर 2026 तक इन सभी श्रेणियों में आवेदन के लिए जगह उपलब्ध थी। इस वीजा की शुरुआती फीस 1,355 न्यूजीलैंड डॉलर है।

हर पेशे के लिए अलग शैक्षणिक योग्यता और अनुभव तय किया गया है।

योग प्रशिक्षक: आवेदक के पास भारत सरकार से मान्यता प्राप्त संस्थान से योग में कम से कम स्नातक की डिग्री होनी चाहिए।

भारतीय शेफ: भारतीय व्यंजन से जुड़ी उच्च शिक्षा की योग्यता के साथ कम से कम दो साल का संबंधित कार्य अनुभव जरूरी है। यह अनुभव योग्यता हासिल करने के बाद का होना चाहिए।

संगीत शिक्षक: संगीत में स्नातक या उसके बराबर तीन साल की उच्च शिक्षा की योग्यता और कम से कम दो साल का संबंधित कार्य अनुभव होना चाहिए।

आयुष विशेषज्ञ: आवेदक के पास आयुष मंत्रालय से मान्यता प्राप्त भारतीय पारंपरिक चिकित्सा या आयुष पद्धति में स्नातक की डिग्री होनी चाहिए। डिग्री के तहत कम से कम तीन साल की पढ़ाई और संबंधित क्षेत्र में कम से कम चार साल का कार्य अनुभव जरूरी है। आयुष में आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा रिग्पा और होम्योपैथी शामिल हैं।

इस वीजा के लिए नौकरी का प्रस्ताव कम से कम 30 घंटे प्रति सप्ताह के काम का होना चाहिए। नौकरी देने वाला संस्थान न्यूजीलैंड की मान्यता प्राप्त नियोक्ता कार्य वीजा (Accredited Employer Work Visa) व्यवस्था के तहत पंजीकृत होना चाहिए।

वीजा धारक केवल उसी पद, नियोक्ता और स्थान पर काम कर सकेंगे, जिसका उल्लेख उनके वीजा में होगा। वे अपने जीवनसाथी या आश्रित बच्चों को इस वीजा आवेदन में शामिल नहीं कर सकते।

इस वीजा के तहत तीन साल की अवधि पूरी होने के बाद दोबारा इंडिया आइकॉनिक वर्क वीजा या इंडिया स्किल्ड वर्क वीजा पाने के लिए कम से कम तीन साल तक न्यूजीलैंड से बाहर रहना होगा।

भारतीय विद्यार्थियों और पीएचडी धारकों को भी फायदा

इस समझौते के तहत भारतीय विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई के बाद काम करने के अवसर भी बढ़ाए गए हैं। 16 नवंबर 2026 से न्यूजीलैंड की पीएचडी डिग्री हासिल करने वाले भारतीय विद्यार्थियों को पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा के तहत अधिकतम चार साल तक काम करने का अवसर मिलेगा। पहले यह अवधि तीन साल तक थी।

फतेह एजुकेशन के सीईओ सुनीत सिंह कोचर के अनुसार, यह बदलाव विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करने की योजना बना रहे भारतीय विद्यार्थियों के लिए एक नया अवसर है। उनके मुताबिक, भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता शोध के अवसरों, पढ़ाई के बाद रोजगार और डिग्री के दीर्घकालिक महत्व के लिहाज से विद्यार्थियों के फैसले को प्रभावित कर सकता है।

कोचर का मानना है कि उन्नत शोध करने वाले विद्यार्थियों के लिए न्यूजीलैंड एक पसंदीदा विकल्प बन सकता है। वहां पीएचडी के बाद चार साल तक काम करने का अवसर मिलने से विद्यार्थी अपनी शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ पेशेवर अनुभव भी हासिल कर सकेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच संयुक्त शोध, शिक्षकों के आदान-प्रदान और शैक्षणिक संस्थानों की साझेदारी को बढ़ावा देने का अवसर देता है। इससे विद्यार्थियों को शोध और ज्ञान साझा करने के अधिक अवसर मिल सकते हैं।

समझौते में पढ़ाई के दौरान काम करने के अधिकार को लेकर भी प्रावधान किया गया है। फिलहाल भारतीय विद्यार्थियों सहित सभी पात्र विदेशी विद्यार्थी न्यूजीलैंड में पढ़ाई के दौरान सप्ताह में अधिकतम 25 घंटे काम कर सकते हैं। भविष्य में यदि वहां की सरकार इस नियम में बदलाव करती है, तब भी भारत के विद्यार्थियों के लिए सप्ताह में कम से कम 20 घंटे काम करने का अधिकार सुनिश्चित रहेगा।

18 से 30 साल के युवाओं के लिए वर्किंग हॉलिडे योजना

भारत और न्यूजीलैंड के बीच समझौता लागू होने के दो साल के भीतर भारतीय नागरिकों के लिए नई वर्किंग हॉलिडे योजना शुरू की जाएगी। इसके तहत 18 से 30 वर्ष की उम्र के युवाओं को न्यूजीलैंड में रहने और काम करने का अवसर मिलेगा।

इस योजना के तहत हर साल अधिकतम 1,000 भारतीय युवाओं को जगह मिलेगी। चयनित आवेदक न्यूजीलैंड में 12 महीने तक रह सकेंगे। यह योजना युवाओं को विदेश में काम करने के साथ वहां की संस्कृति और जीवनशैली को समझने का अवसर भी देगी।

न्यूजीलैंड में भारतीय प्रतिभाओं के लिए नए अवसर

मैनिफेस्ट ग्लोबल (Manifest Global) के रणनीतिक साझेदारी और विकास विभाग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सागर बहादुर के अनुसार, भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते को केवल व्यापारिक समझौते के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह दोनों देशों के बीच प्रतिभा, शिक्षा और आर्थिक अवसरों के आदान-प्रदान को नए सिरे से आगे बढ़ाने का अवसर भी है।

बहादुर ने कहा कि विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के विद्यार्थियों, 5,000 कुशल भारतीय पेशेवरों और हर साल 1,000 युवा भारतीयों के लिए बनाए गए अवसर एक अच्छी शुरुआत हैं। हालांकि, उनके अनुसार केवल लोगों का एक देश से दूसरे देश जाना ही प्रगति नहीं है। इसके साथ रोजगार, कौशल विकास और शिक्षा के बेहतर अवसर तैयार करना भी जरूरी है।

उन्होंने विश्वविद्यालयों से भविष्य की जरूरतों के मुताबिक विद्यार्थियों को तैयार करने, कंपनियों से केवल डिग्री के बजाय कौशल को महत्व देने और सरकारों से प्रतिभाओं को साझा अवसर के रूप में देखने की जरूरत पर जोर दिया।

बहादुर के मुताबिक, इस समझौते की असली सफलता केवल इस बात से तय नहीं होगी कि कितने लोग दोनों देशों के बीच आते-जाते हैं, बल्कि इससे भी तय होगी कि दोनों देशों में उनके लिए कितने नए अवसर तैयार होते हैं।

न्यूजीलैंड का आव्रजन विभाग स्पष्ट कर चुका है कि समझौते के तहत शुरू किए गए सभी नए वीजा विकल्प देश के मौजूदा आव्रजन नियमों के दायरे में ही काम करेंगे। इसलिए आवेदकों को संबंधित वीजा की शर्तें पूरी करनी होंगी। इच्छुक भारतीय नागरिक आवेदन प्रक्रिया और पात्रता से जुड़ी विस्तृत जानकारी न्यूजीलैंड के आधिकारिक आव्रजन विभाग की वेबसाइट पर देख सकते हैं।

Raish Ahmed

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