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IIT Delhi Open House 2026 में प्रदर्शित आयरन जांच किट और सेना के लिए हेक्सापॉड रोबोट

IIT Delhi Open House 2026: डेढ़ रुपये की आयरन जांच गोली और सेना के लिए रोबोट

आईआईटी दिल्ली के 19वें ओपन हाउस में 500 से अधिक तकनीकी परियोजनाओं का प्रदर्शन, भुट्टे के कचरे से बनेगा पर्यावरण के अनुकूल पैकेजिंग फिलर

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली के 19वें ओपन हाउस में छात्रों और शोधकर्ताओं के ऐसे कई नवाचार देखने को मिले, जो स्वास्थ्य, रक्षा और पर्यावरण से जुड़ी रोजमर्रा की चुनौतियों का समाधान खोजने की कोशिश कर रहे हैं। 31 अक्टूबर को आयोजित इस कार्यक्रम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्वांटम तकनीक, सेमीकंडक्टर, रोबोटिक्स, जैव प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और रक्षा सहित 10 प्रमुख क्षेत्रों में 500 से अधिक तकनीकी प्रस्तुतियां और शोध कार्य प्रदर्शित किए गए।

प्रदर्शनी में सबसे अधिक ध्यान खींचने वाले नवाचारों में महज डेढ़ रुपये की लागत वाली आयरन जांच गोली, दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर सेना के लिए सामान पहुंचाने वाला छह पैरों का रोबोट और भुट्टे के कचरे से तैयार पैकेजिंग फिलर शामिल रहे। इन परियोजनाओं के जरिए छात्रों ने दिखाया कि शोध और नई तकनीक का इस्तेमाल आम लोगों की समस्याओं को हल करने के साथ-साथ देश की जरूरतों को पूरा करने में भी किया जा सकता है।

आईआईटी दिल्ली के इस आयोजन में करीब 4,500 लोगों ने हिस्सा लिया। इनमें लगभग 3,000 स्कूली और कॉलेज के छात्र तथा 1,500 से अधिक अन्य आगंतुक शामिल थे। कार्यक्रम का उद्घाटन रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार प्रणाली महानिदेशक डॉ. बिनय कुमार दास ने किया।

उन्होंने स्वदेशी तकनीक के विकास के लिए शिक्षण संस्थानों, उद्योगों और राष्ट्रीय शोध संगठनों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई। उनके अनुसार, देश की तकनीकी जरूरतों को पूरा करने के लिए युवाओं को शोध और नवाचार से जोड़ना महत्वपूर्ण है।

डेढ़ रुपये की गोली से खाद्य पदार्थों में आयरन की जांच

ओपन हाउस में प्रदर्शित स्वास्थ्य संबंधी नवाचारों में एक ऐसी त्वरित जांच किट शामिल रही, जिसकी मदद से खाद्य सामग्री और दवाओं में आयरन की मौजूदगी और गुणवत्ता की जांच की जा सकेगी। इस तकनीक में इस्तेमाल होने वाली गोली की कीमत करीब डेढ़ रुपये बताई गई है।

आईआईटी दिल्ली के ग्रामीण विकास एवं प्रौद्योगिकी केंद्र से जुड़े शोधकर्ताओं और उद्योग सहयोगियों प्रेरणा भारद्वाज तथा अंकुर राणा के अनुसार, इस किट का उद्देश्य कम लागत में आयरन की जांच की सुविधा उपलब्ध कराना है। यह तकनीक खासतौर पर उन क्षेत्रों में उपयोगी हो सकती है, जहां महंगी जांच सुविधाएं आसानी से उपलब्ध नहीं हैं।

आयरन शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व है। इसकी कमी से एनीमिया यानी खून की कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में खाद्य पदार्थों और दवाओं में आयरन की गुणवत्ता जांचने की सस्ती सुविधा पोषण से जुड़े कार्यक्रमों और खाद्य गुणवत्ता की निगरानी में मददगार हो सकती है।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस जांच किट को अगले छह महीनों में बाजार में उतारने की योजना है। हालांकि, इसकी वास्तविक उपयोगिता और व्यापक उपलब्धता का पता बाजार में आने तथा आवश्यक परीक्षणों के बाद ही चलेगा।

सेना के लिए सात किलो सामान ले जाएगा छह पैरों वाला रोबोट

रक्षा क्षेत्र में उपयोग के लिए आईआईटी दिल्ली के कंप्यूटर विज्ञान के छात्रों ने हेक्सापॉड नाम का छह पैरों वाला रोबोट तैयार किया है। यह रोबोट दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर सात किलोग्राम तक सामान ले जाने में सक्षम बनाया गया है।

इस परियोजना पर काम करने वाले छात्र ज्ञान प्रकाश और शिवांश के अनुसार, रोबोट में स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसका उद्देश्य ऐसे इलाकों में जरूरी सामान पहुंचाना आसान बनाना है, जहां ऊबड़-खाबड़ रास्तों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सामान्य वाहनों से पहुंचना मुश्किल होता है।

सीमा से लगे पहाड़ी इलाकों में सैनिकों तक भोजन, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान पहुंचाना कई बार चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में इस तरह के रोबोट भविष्य में सेना की लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, वास्तविक सैन्य इस्तेमाल से पहले इसकी क्षमता और कठिन परिस्थितियों में काम करने की विश्वसनीयता का परीक्षण जरूरी होगा।

इसके अलावा, छात्रों ने स्वचालित मोबाइल रोबोट (AMR) भी विकसित किए हैं। इनका इस्तेमाल गोदामों और ग्रामीण क्षेत्रों में सामान एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने जैसे कामों में किया जा सकता है।

भुट्टे के कचरे से तैयार हुआ पैकेजिंग फिलर

पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी एक अन्य परियोजना में आईआईटी दिल्ली के इनक्यूबेटेड स्टार्टअप ने भुट्टे और अन्य कृषि अपशिष्ट से पैकेजिंग फिलर तैयार किया है। इसका इस्तेमाल ऑनलाइन खरीदारी के दौरान गिफ्ट, इलेक्ट्रॉनिक सामान और दूसरी नाजुक वस्तुओं को सुरक्षित रखने के लिए किया जा सकता है।

आमतौर पर सामान की पैकिंग में थर्माकोल और प्लास्टिक आधारित सामग्री का इस्तेमाल होता है। इनसे निकलने वाला कचरा पर्यावरण के लिए चुनौती बनता है। ऐसे में कृषि अपशिष्ट से तैयार यह विकल्प कचरे के दोबारा उपयोग को बढ़ावा दे सकता है।

इस पैकेजिंग फिलर की खासियत यह बताई गई है कि यह पानी में करीब दो मिनट में घुल सकता है और मिट्टी में भी अपघटित हो सकता है। इसकी कीमत लगभग 600 रुपये प्रति किलोग्राम रखी गई है।

यह तकनीक एक ओर कृषि अपशिष्ट के उपयोग का रास्ता खोलती है, वहीं दूसरी ओर पैकेजिंग उद्योग को पर्यावरण के अनुकूल विकल्प उपलब्ध कराने की संभावना भी रखती है। हालांकि, बड़े स्तर पर उत्पादन, लागत और वास्तविक उपयोग के दौरान इसकी मजबूती जैसे पहलुओं का आकलन इसके व्यावसायिक विस्तार के लिए महत्वपूर्ण होगा।

छात्रों के लिए शोध और नवाचार को करीब से समझने का अवसर

आईआईटी दिल्ली का ओपन हाउस केवल तकनीकी परियोजनाओं की प्रदर्शनी नहीं है, बल्कि स्कूली और कॉलेज छात्रों को उच्च शिक्षा, शोध और स्टार्टअप की दुनिया से जोड़ने का भी एक माध्यम है।

इस वर्ष कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रोटोटाइप और नवाचार प्रदर्शन, 225 से अधिक शोध पोस्टर, 80 से अधिक प्रयोगशाला प्रदर्शन और विद्यार्थियों की 90 से अधिक तीन मिनट की शोध प्रस्तुतियां शामिल थीं। आईआईटी दिल्ली के करीब 1,200 छात्रों ने आयोजन से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया।

कार्यक्रम में आईआईटी दिल्ली के पूर्व छात्रों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 43 पूर्व छात्रों की टीम ने अलग-अलग विषयों में विद्यार्थियों के शोध पोस्टर, प्रस्तुतियों और तकनीकी प्रदर्शनों का मूल्यांकन किया। उत्कृष्ट परियोजनाओं को शोध एवं नवाचार पुरस्कारों के माध्यम से प्रोत्साहित किया गया।

कुल मिलाकर, आईआईटी दिल्ली का 19वां ओपन हाउस यह दिखाता है कि देश के शिक्षण संस्थानों में विकसित हो रही तकनीकें अब केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं हैं। कम लागत वाली स्वास्थ्य जांच, सेना के लिए रोबोट और कृषि कचरे से पर्यावरण के अनुकूल पैकेजिंग जैसे प्रयोग इस बात की ओर इशारा करते हैं कि सही सहयोग और व्यावसायिक समर्थन मिलने पर छात्र शोध समाज की वास्तविक जरूरतों का समाधान बन सकता है।

Raish Ahmed

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