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NCERT की कक्षा 9 की किताब में अब पढ़ेंगे FD, म्यूचुअल फंड और बिजनेस के गुर, जानें क्या होंगे बदलाव

अब कक्षा 9 के विद्यार्थियों को अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों के साथ पैसों का सही इस्तेमाल करना और कारोबार की बुनियादी बातें भी सिखाई जाएंगी। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की नई सामाजिक विज्ञान की किताब में व्यक्तिगत वित्त और उद्यमिता पर दो अलग-अलग अध्याय शामिल किए गए हैं। इनमें विद्यार्थियों को बचत, निवेश, बैंक से मिलने वाले ब्याज, लोन की किस्त, टैक्स और बिजनेस शुरू करने जैसे विषयों की जानकारी मिलेगी।

NCERT की नई पुस्तक Understanding Society: India and Beyond – Part II के अर्थशास्त्र खंड में ये अध्याय जोड़े गए हैं। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य और अर्थशास्त्री संजीव सान्याल ने 3 नवंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इन अध्यायों की जानकारी साझा की। उनके मुताबिक, इनका उद्देश्य विद्यार्थियों को ऐसी वित्तीय जानकारी और जीवन से जुड़ी उपयोगी बातें सिखाना है, जिनकी जरूरत उन्हें आगे चलकर पड़ सकती है।

पॉकेट मनी से निवेश तक, सीखेंगे पैसों का सही इस्तेमाल

किताब में पांचवें अध्याय का नाम ‘Managing Your Personal Finances’ यानी ‘अपने व्यक्तिगत वित्त का प्रबंधन’ है। इसकी शुरुआत बच्चों के रोजमर्रा के अनुभवों से होती है। इसमें पॉकेट मनी और त्योहारों या अन्य मौकों पर रिश्तेदारों से मिलने वाले पैसों का उदाहरण दिया गया है। विद्यार्थियों से पूछा जाता है कि वे मिले हुए पैसे तुरंत खर्च कर देते हैं या कुछ हिस्सा भविष्य की जरूरतों के लिए बचाकर रखते हैं।

इसके बाद उन्हें आमदनी, बजट बनाने, बचत और निवेश के बारे में समझाया जाएगा। अध्याय में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), शेयर, सरकारी बॉन्ड और म्यूचुअल फंड जैसे निवेश के विकल्पों की जानकारी दी गई है। साथ ही यह भी बताया गया है कि निवेश में जोखिम और मिलने वाले रिटर्न के बीच क्या संबंध होता है। आमतौर पर अधिक जोखिम वाले निवेश में ज्यादा रिटर्न की संभावना हो सकती है, लेकिन नुकसान का खतरा भी बढ़ जाता है।

विद्यार्थियों को यह समझने का मौका मिलेगा कि निवेश का विकल्प चुनते समय अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखना क्यों जरूरी है। इसके अलावा, लोन चुकाने के लिए हर महीने दी जाने वाली किस्त यानी EMI और टैक्स से जुड़े विषय भी पढ़ाए जाएंगे।

इनकम टैक्स और GST की भी मिलेगी जानकारी

नए अध्याय में टैक्स की बुनियादी जानकारी भी शामिल है। विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर के बीच अंतर समझाया जाएगा। इनकम टैक्स प्रत्यक्ष कर का उदाहरण है, जबकि वस्तु एवं सेवा कर (GST) अप्रत्यक्ष कर की श्रेणी में आता है।

किताब में यह भी बताया गया है कि सरकार सार्वजनिक सेवाओं और विकास से जुड़े कामों के लिए टैक्स क्यों वसूलती है। इसके साथ प्रगतिशील कर व्यवस्था की जानकारी दी गई है, जिसमें अधिक आय वाले लोगों पर अपेक्षाकृत अधिक कर दर लागू होती है।

इस तरह विद्यार्थियों को कम उम्र से ही यह समझने में मदद मिलेगी कि आमदनी, खर्च, बचत और टैक्स का आपस में क्या संबंध है। हालांकि, इन विषयों का उद्देश्य वित्तीय मामलों की शुरुआती समझ विकसित करना है, न कि विद्यार्थियों को किसी खास निवेश विकल्प को अपनाने की सलाह देना।

नींबू पानी का स्टॉल लगाकर समझेंगे कारोबार का गणित

किताब का छठा अध्याय ‘From Ideas to Startups’ यानी ‘विचार से स्टार्टअप तक’ उद्यमिता पर केंद्रित है। इसमें विद्यार्थियों को बताया जाएगा कि किसी छोटे कारोबार की शुरुआत कैसे होती है और उसे चलाने के लिए किन बातों का ध्यान रखना पड़ता है।

इस अध्याय में स्कूल के वार्षिक कार्यक्रम में नींबू पानी का स्टॉल लगाने का उदाहरण दिया गया है। विद्यार्थियों को एक गतिविधि के तहत स्टॉल शुरू करने की योजना बनानी होगी। इसके लिए उन्हें नींबू, चीनी, पानी, गिलास और अन्य जरूरी सामान की लागत का हिसाब लगाना होगा। इसके बाद उन्हें तय करना होगा कि एक गिलास नींबू पानी किस कीमत पर बेचा जाए, ताकि खर्च निकालने के बाद कमाई भी हो सके।

गतिविधि के अंत में विद्यार्थियों को कुल बिक्री, खर्च और कमाई का हिसाब तैयार करना होगा। इससे वे समझ सकेंगे कि किसी कारोबार में मुनाफा या नुकसान कैसे तय होता है। किताब में बेकरी का उदाहरण भी दिया गया है, जिसके जरिए किराया, कच्चे माल, कर्मचारियों के वेतन और बिजली जैसे खर्चों का कारोबार की कमाई पर असर समझाया गया है।

बिजनेस प्लान, मार्केटिंग और टीमवर्क भी सीखेंगे

उद्यमिता से जुड़े अध्याय में केवल सामान बेचने या मुनाफा कमाने की जानकारी नहीं दी गई है। इसमें बिजनेस प्लान तैयार करने, ग्राहकों की जरूरत समझने, लागत का अनुमान लगाने और उत्पाद या सेवा के प्रचार जैसे विषय भी शामिल हैं।

विद्यार्थियों को कारोबार के अलग-अलग कामों की जानकारी दी जाएगी। इनमें प्रबंधन और संचालन, वित्त एवं लेखा, मानव संसाधन तथा मार्केटिंग और बिक्री शामिल हैं। इसके अलावा, उन्हें अपने आसपास कारोबार करने वाले लोगों से बातचीत कर उनके सामने आने वाली चुनौतियों को समझने और अपना बिजनेस प्लान तैयार करने जैसी गतिविधियां भी दी जाएंगी।

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल ने इन अध्यायों की सराहना करते हुए कहा है कि नई किताब में कारोबार, नवाचार और जोखिम उठाने को सकारात्मक गतिविधियों के रूप में समझाया गया है। उनके अनुसार, उद्यमिता से जुड़े विषयों को पढ़ाने का यह तरीका पहले की किताबों में कारोबार को मुख्य रूप से जमाखोरी और काला बाजारी जैसे उदाहरणों से जोड़कर देखने से अलग है।

स्कूल की पढ़ाई को रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़ने की कोशिश

NCERT की नई किताब में व्यक्तिगत वित्त और उद्यमिता को जगह देना स्कूल शिक्षा में व्यावहारिक जानकारी को महत्व देने की दिशा में एक कदम है। अक्सर विद्यार्थी अर्थव्यवस्था से जुड़े सिद्धांत तो पढ़ते हैं, लेकिन उन्हें बजट बनाने, बचत करने, निवेश के विकल्प समझने या किसी छोटे कारोबार का हिसाब रखने का अवसर कम मिलता है।

इन नए अध्यायों के जरिए विद्यार्थियों को कम उम्र में ही पैसों से जुड़े फैसलों और कारोबार की बुनियादी समझ देने की कोशिश की गई है। इससे आगे चलकर उन्हें अपनी आमदनी और खर्च का प्रबंधन करने, वित्तीय जोखिम समझने और नए व्यावसायिक विचारों पर काम करने में मदद मिल सकती है।

Raish Ahmed

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