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नई शिक्षा नीति में गणित की भूमिका: IISc प्रोफेसर ने क्यों कहा- मैथ्स भी एक भाषा है?

नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत स्कूली शिक्षा में भाषा सीखने पर विशेष जोर दिया गया है। तीन भाषा फॉर्मूले के जरिए विद्यार्थियों को अलग-अलग भाषाओं से परिचित कराने की व्यवस्था की गई है। इसमें हिंदी, अंग्रेजी और अन्य भारतीय भाषाओं के साथ विदेशी भाषाओं को सीखने के अवसर भी शामिल हो सकते हैं। इसी बीच भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु के प्रोफेसर प्रथोष एपी ने गणित को भी एक भाषा के रूप में देखने का विचार सामने रखा है।

उनका कहना है कि विद्यार्थियों को गणित के साथ ऐसी भाषा भी सीखनी चाहिए, जिसके जरिए वे अपने विचार दूसरों तक पहुंचा सकें। यह नजरिया गणित को केवल सवाल हल करने, सूत्र याद करने या परीक्षा में अंक हासिल करने तक सीमित नहीं रखता, बल्कि इसे तार्किक सोच और दुनिया को समझने का माध्यम मानता है।

प्रोफेसर प्रथोष एपी ने Ground Truth पॉडकास्ट में अपने विचार रखते हुए बताया कि गणित और संवाद की भाषा, दोनों ही विद्यार्थियों के विकास में अहम भूमिका निभाती हैं। खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के दौर में इन दोनों कौशलों का महत्व और बढ़ जाता है।

गणित हमें तार्किक तरीके से सोचना सिखाता है

प्रोफेसर प्रथोष एपी के मुताबिक, हिंदी, अंग्रेजी या किसी अन्य भाषा के जरिए हम दुनिया से संवाद करते हैं। इन भाषाओं की मदद से हम अपनी बातें समझाते हैं, कहानियां सुनाते हैं, विचार साझा करते हैं और दूसरों को अपने काम का महत्व बताते हैं।

इसके विपरीत, गणित हमें सटीक तरीके से सोचने, तर्क करने और किसी समस्या को गहराई से समझने में मदद करता है। गणित के जरिए हम किसी बात को स्पष्ट रूप से परिभाषित करना, उसके पीछे की मान्यताओं को समझना और तर्क के आधार पर निष्कर्ष तक पहुंचना सीखते हैं।

उदाहरण के लिए, अगर किसी इंजीनियर से कहा जाए कि किसी प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है, तो सबसे पहले यह स्पष्ट करना होगा कि प्रभावी बनाने का मतलब क्या है। क्या काम को कम समय में पूरा करना है, लागत घटानी है, संसाधनों का कम इस्तेमाल करना है या काम की सटीकता बढ़ानी है?

जब तक समस्या को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया जाएगा, तब तक उसका सही समाधान तलाशना मुश्किल होगा। गणित इसी तरह किसी अस्पष्ट विचार को एक ऐसी समस्या में बदलने में मदद करता है, जिसका विश्लेषण किया जा सके और जिसके समाधान को परखा जा सके।

यह कौशल केवल गणित की कक्षा तक सीमित नहीं है। विज्ञान, शोध, कारोबार और रोजमर्रा के फैसलों में भी स्पष्ट सोच और सही तर्क की जरूरत होती है।

केवल सही जवाब देना नहीं, अपनी सोच समझाना भी जरूरी

प्रोफेसर प्रथोष एपी के विचारों का एक अहम पहलू यह है कि केवल तार्किक तरीके से सोचना पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को अपनी बात दूसरों तक स्पष्ट रूप से पहुंचाना भी आना चाहिए।

किसी विद्यार्थी के पास अच्छा विचार हो सकता है या वह किसी समस्या का सही समाधान निकाल सकता है, लेकिन अगर वह अपने विचार को दूसरों के सामने ठीक से नहीं रख पाता, तो उसके काम का महत्व समझाना मुश्किल हो सकता है।

इसलिए शिक्षा का उद्देश्य केवल विषयों की जानकारी देना या परीक्षा में अच्छे अंक दिलाना नहीं होना चाहिए। विद्यार्थियों में यह क्षमता भी विकसित होनी चाहिए कि वे किसी समस्या को समझें, उसके संभावित समाधानों पर विचार करें और अपने निष्कर्षों के पीछे का तर्क दूसरों को बता सकें।

यही कारण है कि गणित और संवाद की भाषा को एक-दूसरे का पूरक माना जा सकता है। गणित सोच को स्पष्ट करने में मदद करता है, जबकि भाषा उस सोच को दूसरों तक पहुंचाने का माध्यम बनती है।

AI के दौर में गणित सीखना क्यों जरूरी?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल ने पढ़ाई और काम करने के तरीकों को बदलना शुरू कर दिया है। आज AI की मदद से लिखने, कोडिंग करने और बड़ी मात्रा में जानकारी का विश्लेषण करने जैसे काम किए जा सकते हैं। ऐसे में विद्यार्थियों के सामने चुनौती केवल जानकारी हासिल करने की नहीं, बल्कि सही सवाल पूछने और समस्याओं को समझने की भी है।

प्रोफेसर प्रथोष एपी के विचारों के अनुसार, विद्यार्थियों को यह पहचानना सीखना होगा कि कौन-सी समस्या महत्वपूर्ण है, उसके संभावित समाधान क्या हो सकते हैं और किसी समाधान के पीछे कौन-सा तर्क काम कर रहा है। उन्हें अपनी सोच दूसरों के सामने स्पष्ट रूप से रखने की क्षमता भी विकसित करनी होगी।

उदाहरण के लिए, AI किसी विद्यार्थी को गणित का सवाल हल करने में मदद कर सकता है। लेकिन विद्यार्थी के लिए यह समझना भी जरूरी है कि समाधान तक पहुंचने के लिए कौन-से कदम उठाए गए, इस्तेमाल किया गया तरीका सही क्यों है और क्या उस समस्या को हल करने का कोई दूसरा तरीका भी हो सकता है।

इसलिए केवल तकनीक का इस्तेमाल करना सीखना पर्याप्त नहीं होगा। विद्यार्थियों को अपनी समझ, तर्क करने की क्षमता और संवाद कौशल को भी मजबूत बनाना होगा।

नई शिक्षा नीति 2020 और तीन भाषा फॉर्मूले का क्या है संबंध?

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में बहुभाषिकता यानी एक से अधिक भाषाएं सीखने को महत्व दिया गया है। नीति के अनुसार, तीन भाषा फॉर्मूले को लचीले तरीके से लागू किया जाना है। इसमें कम से कम दो भाषाएं भारतीय भाषाएं होनी चाहिए और किसी राज्य या विद्यार्थी पर कोई भाषा थोपने की बात नहीं कही गई है। भाषाओं का चयन राज्यों, क्षेत्रों और विद्यार्थियों की पसंद को ध्यान में रखकर किया जाना है।

हालांकि, प्रोफेसर प्रथोष एपी का सुझाव तीन भाषा फॉर्मूले से अलग एक व्यापक शैक्षणिक नजरिया पेश करता है। वह इस बात पर ध्यान दिलाते हैं कि विद्यार्थियों को संवाद के लिए किसी भाषा में दक्ष होने के साथ-साथ गणित के जरिए स्पष्ट और तार्किक तरीके से सोचना भी सीखना चाहिए।

इसका अर्थ यह नहीं है कि गणित को औपचारिक रूप से तीसरी या चौथी भाषा के रूप में स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने का प्रस्ताव दिया गया है। बल्कि यह गणित को पढ़ाने और सीखने के उद्देश्य को नए नजरिए से समझने की बात है।

विद्यार्थियों के लिए क्या है सबसे अहम सीख?

प्रोफेसर प्रथोष एपी का विचार शिक्षा के उद्देश्य पर एक महत्वपूर्ण सवाल उठाता है। क्या पढ़ाई का मकसद केवल तथ्यों को याद करना और परीक्षाओं में अच्छे अंक लाना है, या विद्यार्थियों को स्वतंत्र रूप से सोचने, समस्याओं का समाधान खोजने और अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने के लिए भी तैयार करना चाहिए?

गणित को केवल सूत्रों और सवालों तक सीमित रखने के बजाय उसके पीछे के तर्क को समझना विद्यार्थियों को अधिक स्पष्ट सोच विकसित करने में मदद कर सकता है। वहीं, हिंदी, अंग्रेजी या किसी अन्य भाषा में संवाद करने का अभ्यास उन्हें अपने विचारों और ज्ञान को दूसरों तक पहुंचाने में सक्षम बनाता है।

AI के दौर में इन दोनों क्षमताओं का महत्व और बढ़ सकता है। स्पष्ट सोच और प्रभावी संवाद—यही वे दो कौशल हैं, जिन्हें मजबूत करने पर विद्यार्थियों को ध्यान देना चाहिए।

Raish Ahmed

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