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प्रेसिडेंसी यूनिवर्सिटी में 71वें कर्नाटक राज्योत्सव का जश्न, सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘नाडोत्सव 2026’ का आयोजन

कर्नाटक की भाषा, विरासत और सांस्कृतिक पहचान का जश्न मनाने के लिए प्रेसिडेंसी यूनिवर्सिटी ने 71वें कर्नाटक राज्योत्सव के अवसर पर ‘नाडोत्सव 2026’ का आयोजन किया। इस कार्यक्रम के जरिए राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को सामने लाने के साथ युवा पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति और विरासत के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया।

इस अवसर पर वर्ष 2019 के कर्नाटक राज्योत्सव पुरस्कार से सम्मानित प्रो. डॉ. अंजनप्पा टी.एच. मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व दिया। आयोजन में कर्नाटक की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को सम्मान देने पर जोर दिया गया।

कर्नाटक राज्योत्सव हर साल 1 नवंबर को मनाया जाता है। यह दिन वर्ष 1956 में कर्नाटक राज्य के गठन की याद दिलाता है। इसी दिन कन्नड़ भाषी विभिन्न क्षेत्रों को मिलाकर एक राज्य बनाया गया था। कन्नड़ भाषा बोलने वाले लोगों के लिए यह दिन खास महत्व रखता है, क्योंकि यह उनकी भाषाई और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है।

नाडोत्सव 2026 के माध्यम से प्रेसिडेंसी यूनिवर्सिटी ने कर्नाटक की सांस्कृतिक विरासत के विभिन्न पहलुओं को सामने रखा। इसमें राज्य की भाषा, संस्कृति और परंपराओं के महत्व को प्रमुखता दी गई। यह आयोजन इस बात का भी उदाहरण बना कि शिक्षण संस्थान छात्रों को भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

कार्यक्रम के दौरान कर्नाटक की विविध सांस्कृतिक पहचान और उसकी समृद्ध परंपराओं को सम्मान दिया गया। साथ ही, छात्रों के बीच देश की भाषाई और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाने में विश्वविद्यालयों की भूमिका को भी रेखांकित किया गया।

विश्वविद्यालयों जैसे उच्च शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी केवल छात्रों को अकादमिक शिक्षा और किताबी ज्ञान देना ही नहीं है। उन्हें छात्रों को सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का काम भी करना चाहिए। कर्नाटक राज्योत्सव जैसे आयोजन छात्रों में अपनी भाषा, समुदाय और संस्कृति के प्रति गर्व की भावना विकसित करते हैं। साथ ही, ऐसे कार्यक्रम उन्हें भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता का सम्मान करना भी सिखाते हैं।

प्रेसिडेंसी यूनिवर्सिटी की ओर से आयोजित नाडोत्सव 2026 ने एक बार फिर कर्नाटक की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और कन्नड़ भाषा के प्रति गौरव की भावना को सामने लाने का काम किया।

Raish Ahmed

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