West Bengal School Curriculum 2027: पश्चिम बंगाल की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी है। राज्य सरकार नई पाठ्यपुस्तकों में भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन और उनके योगदान को शामिल करेगी। इसके साथ ही आठवीं कक्षा की किताब से सिंगूर भूमि अधिग्रहण आंदोलन से जुड़ा अध्याय हटाया जाएगा। छठी कक्षा की पाठ्यपुस्तकों से राज्य सरकार की चर्चित कन्याश्री योजना से संबंधित अध्याय हटाने की भी सिफारिश की गई है।
पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन ने बुधवार को इन बदलावों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पाठ्यक्रम में बदलाव के लिए गठित समिति ने अपना काम पूरा कर लिया है। नई पाठ्यपुस्तकों में पश्चिम बंगाल के इतिहास और राज्य की प्रमुख हस्तियों को अधिक जगह देने पर जोर दिया गया है। सरकार का उद्देश्य स्कूली पाठ्यक्रम में राज्य के इतिहास और महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों से जुड़ी जानकारी को नए सिरे से शामिल करना है।
हर कक्षा की किताब में होगा श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जिक्र
नई पाठ्यपुस्तकों में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को विशेष स्थान दिया जाएगा। शिक्षा मंत्री के अनुसार, उनकी जीवनी और योगदान का संक्षिप्त परिचय हर पाठ्यपुस्तक में शामिल किया जाएगा। इसका मतलब है कि प्राथमिक से लेकर उच्च कक्षाओं तक की किताबों में विद्यार्थियों को उनके बारे में पढ़ने का अवसर मिलेगा।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारतीय जनसंघ के संस्थापक थे। उनका जन्म 6 जुलाई 1901 को कोलकाता में हुआ था। वह शिक्षाविद् और राजनेता होने के साथ-साथ स्वतंत्र भारत के शुरुआती केंद्रीय मंत्रिमंडल में उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री भी रहे थे। भारतीय राजनीति और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए अब पश्चिम बंगाल सरकार उन्हें स्कूली पाठ्यक्रम में प्रमुखता देने जा रही है।
आठवीं की किताब से हटेगा सिंगूर आंदोलन का अध्याय
पाठ्यक्रम में बदलाव के तहत आठवीं कक्षा की पुरानी पाठ्यपुस्तक से सिंगूर आंदोलन से संबंधित अध्याय हटा दिया जाएगा। सिंगूर आंदोलन पश्चिम बंगाल के राजनीतिक और सामाजिक इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना रहा है।
यह आंदोलन वर्ष 2006 में हुगली जिले के सिंगूर में टाटा मोटर्स की नैनो कार परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण के विरोध में शुरू हुआ था। तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण के फैसले के खिलाफ किसानों और स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया था। इस आंदोलन में ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बाद में यह आंदोलन पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव का एक प्रमुख कारण बना।
नई पाठ्यपुस्तकों में इस अध्याय को हटाने का फैसला पाठ्यक्रम में किए जा रहे बदलावों का अहम हिस्सा है।
कन्याश्री योजना का अध्याय हटाने की भी सिफारिश
सिंगूर आंदोलन के अलावा कक्षा 6 की किताबों से कन्याश्री योजना से संबंधित अध्याय हटाने की सिफारिश की गई है। यह योजना पश्चिम बंगाल की पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल रही है।
कन्याश्री योजना की शुरुआत वर्ष 2013 में लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने और कम उम्र में होने वाली शादियों को रोकने के उद्देश्य से की गई थी। इसके तहत पात्र छात्राओं को आर्थिक सहायता दी जाती है, ताकि वे अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।
हालांकि, शिक्षा मंत्री की घोषणा के अनुसार, फिलहाल इस अध्याय को हटाने की सिफारिश समिति की ओर से की गई है।
कक्षा 5 से 8 तक ICT की पढ़ाई होगी अनिवार्य
पश्चिम बंगाल सरकार पाठ्यक्रम में तकनीकी शिक्षा को भी मजबूत करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत कक्षा 5 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) को एक व्यवस्थित विषय के रूप में शामिल किया जाएगा। इसके लिए अलग से निर्धारित पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा।
इस बदलाव का उद्देश्य बच्चों को शुरुआती कक्षाओं से ही डिजिटल तकनीक और सूचना से जुड़े बुनियादी ज्ञान से परिचित कराना है। इसके अलावा कक्षा 7 और 8 के विद्यार्थियों के लिए तीसरी भाषा की पाठ्यपुस्तकें भी शुरू की जाएंगी।
हर किताब की शुरुआत में छपेगा पूरा वंदे मातरम्
नई पाठ्यपुस्तकों में एक और महत्वपूर्ण बदलाव किया जा रहा है। शिक्षा मंत्री के मुताबिक, अब हर पाठ्यपुस्तक की शुरुआत में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का पूरा पाठ प्रकाशित किया जाएगा।
इसके साथ ही सरकार ने स्कूली किताबों में इस्तेमाल होने वाले कागज की गुणवत्ता बेहतर करने की भी जानकारी दी है। इससे विद्यार्थियों को मिलने वाली पाठ्यपुस्तकों की छपाई और गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है।
कक्षा 9 तक पास-फेल व्यवस्था पर जल्द फैसला
पश्चिम बंगाल सरकार स्कूली शिक्षा में पास-फेल व्यवस्था को लेकर भी विचार कर रही है। शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन ने बताया कि कक्षा 9 तक लागू नो-डिटेंशन नीति को लेकर चर्चा जारी है। इस व्यवस्था में बदलाव किया जाएगा या नहीं, इस पर जल्द फैसला लिए जाने की उम्मीद है।
नो-डिटेंशन नीति के तहत विद्यार्थियों को निर्धारित कक्षाओं तक फेल करके अगली कक्षा में जाने से नहीं रोका जाता। यदि राज्य सरकार इसमें बदलाव करती है, तो विद्यार्थियों के मूल्यांकन और अगली कक्षा में प्रमोशन के नियमों पर असर पड़ सकता है।
पश्चिम बंगाल बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं मार्च में हो सकती हैं
पश्चिम बंगाल सरकार वर्ष 2027 की माध्यमिक (कक्षा 10) और उच्च माध्यमिक (कक्षा 12) की परीक्षाओं की तारीखों में बदलाव करने पर भी विचार कर रही है। इसकी मुख्य वजह जनगणना का काम है। जनगणना के दौरान बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों के साथ स्कूली शिक्षकों की भी ड्यूटी लगाई जाएगी। ऐसे में परीक्षा आयोजित करने के लिए शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (WBBSE) ने कक्षा 10 की माध्यमिक परीक्षाओं को पहले से निर्धारित 15 से 25 फरवरी 2027 के बजाय 2 से 16 मार्च 2027 के बीच कराने का प्रस्ताव दिया है।
वहीं, पश्चिम बंगाल उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद (WBCHSE) की ओर से कक्षा 12 की चौथे सेमेस्टर की परीक्षाएं 16 मार्च 2027 के बाद आयोजित करने का प्रस्ताव दिए जाने की उम्मीद है। इन परीक्षाओं के लिए पहले 22 जनवरी से 23 फरवरी के बीच का संभावित कार्यक्रम बताया गया था।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि दोनों बोर्डों की ओर से परीक्षा की तारीखों में बदलाव के प्रस्ताव मिल चुके हैं। सरकार इन पर विचार कर रही है और अगले सप्ताह तक संशोधित परीक्षा कार्यक्रम घोषित किए जाने की उम्मीद है।
फिलहाल विद्यार्थियों को सलाह दी जाती है कि वे प्रस्तावित तारीखों को अंतिम परीक्षा कार्यक्रम न मानें। पश्चिम बंगाल सरकार और संबंधित शिक्षा बोर्ड की आधिकारिक घोषणा के बाद ही नई तारीखों की पुष्टि होगी।




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