चाणक्य यूनिवर्सिटी में 29 से 31 अक्टूबर 2026 तक ‘भारतीय अर्थशास्त्र परंपरा: सिद्धांत, व्यवहार और वर्तमान समय में प्रासंगिकता’ विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर इंडियन नॉलेज सिस्टम्स की ओर से आयोजित इस सम्मेलन का उद्देश्य भारत की पारंपरिक ज्ञान परंपराओं का आज की अर्थव्यवस्था, शासन व्यवस्था और राजनीति के संदर्भ में महत्व समझना और उन पर चर्चा करना था।
सम्मेलन का उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलन और नीति शास्त्र के आचार्यों के स्मरण के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र में बेल्जियम के प्रो. कोएनराड एल्स्ट ने संबोधन दिया। वहीं, इस्कॉन के श्री गौरांग दास प्रभु ने वीडियो संदेश के माध्यम से अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर व्योमा लिंग्विस्टिक लैब्स फाउंडेशन की पुस्तक का विमोचन भी किया गया। इसके अलावा विश्वविद्यालय के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी संबोधित किया।
सम्मेलन के शैक्षणिक कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। प्रो. एम. एस. चैत्र ने समकालीन संदर्भ में अर्थशास्त्र को समझने पर मुख्य व्याख्यान दिया। वहीं, श्री आशीष कुमार गुप्ता ने ग्रामीण भारत की समृद्ध अर्थव्यवस्था विषय पर विशेष व्याख्यान प्रस्तुत किया। इसके अलावा शोध पत्रों के लिए समानांतर सत्र आयोजित किए गए। सम्मेलन में 19वीं और 20वीं सदी के भारतीय राजनीतिक विचारकों और आंदोलनों पर पैनल चर्चा भी हुई।
सम्मेलन के दूसरे दिन प्रो. जोस पी. वर्गीज और श्री कश्यप नाइक ने विशेष व्याख्यान दिए। इस दौरान छात्रों ने पोस्टर प्रस्तुतियों के माध्यम से अपने शोध और विचार साझा किए। शोध पत्रों के समानांतर सत्रों के साथ आधुनिक शासन व्यवस्था पर एक पैनल चर्चा भी आयोजित की गई।
सम्मेलन के दौरान शैक्षणिक चर्चाओं, शोध प्रस्तुतियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से भारतीय बौद्धिक परंपरा के महत्व को सामने लाया गया। साथ ही, इस बात पर भी विचार-विमर्श हुआ कि भारत की पारंपरिक ज्ञान परंपराओं और उनके सिद्धांतों को आज की आर्थिक, सामाजिक और शासन संबंधी चुनौतियों के संदर्भ में किस तरह समझा और अपनाया जा सकता है।




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